UAE Iraq Protest: इराक की धरती से हो रहे हमलों पर UAE का कड़ा एक्शन, दूतावास के अधिकारी को बुलाकर दिया विरोध नोट
UAE सरकार ने इराक के खिलाफ सख्त कदम उठाया है। इराक की ज़मीन से GCC देशों के ज़रूरी ठिकानों पर हो रहे आतंकी हमलों के कारण UAE के विदेश मंत्रालय ने इराक के Chargé d’Affaires ओमर अब्दुलमजीद हामिद अल ओबैदी को तलब किया। मंत्रालय ने उन्हें एक कड़ा विरोध पत्र सौंपा है ताकि इन हमलों को तुरंत रोका जा सके।
UAE ने इराक को क्यों बुलाया और क्या शिकायत की?
UAE के विदेश मंत्रालय (MoFA) के अरब मामलों के विभाग के डायरेक्टर अहमद जुमा अल मराशदा ने यह विरोध नोट सौंपा। UAE ने साफ कहा कि इराक की धरती से ईरान से जुड़े आतंकी गुट और मिलिशिया लगातार हमले कर रहे हैं। इन हमलों में Asaib Ahl al Haq और Harakat Hezbollah al Nujaba जैसे संगठन शामिल हैं। UAE के मुताबिक, ये हमले GCC देशों की संप्रभुता और हवाई क्षेत्र का खुला उल्लंघन हैं और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के खिलाफ हैं।
हमलों की वजह और अंतरराष्ट्रीय नियम क्या कहते हैं?
हैरानी की बात यह है कि ये हमले तब हो रहे हैं जब 8 अप्रैल 2026 को अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्ते का युद्धविराम (ceasefire) हुआ था। UAE ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2817 (2026) का हवाला देते हुए कहा कि पड़ोसी देशों के खिलाफ किसी भी तरह की उकसावे वाली कार्रवाई को तुरंत रोकना होगा। UAE सरकार ने चेतावनी दी है कि उसकी सुरक्षा एक ‘रेड लाइन’ है जिसे कोई पार नहीं कर सकता और वह अपने हितों की रक्षा करने में पूरी तरह सक्षम है।
इस पूरे मामले की मुख्य बातें
इस कूटनीतिक तनाव से जुड़ी ज़रूरी जानकारी नीचे दी गई तालिका में है:
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| तारीख | 15 अप्रैल 2026 |
| बुलाया गया अधिकारी | ओमर अब्दुलमजीद हामिद अल ओबैदी (इराकी दूतावास) |
| UAE प्रतिनिधि | अहमद जुमा अल मराशदा |
| आरोपी समूह | ईरान समर्थित मिलिशिया (AAH, HHN, HAAA) |
| प्रभावित क्षेत्र | GCC देशों के महत्वपूर्ण संस्थान और हवाई क्षेत्र |
| संदर्भ नियम | UN सुरक्षा परिषद प्रस्ताव 2817 (2026) |
| युद्धविराम की तारीख | 8 अप्रैल 2026 (अमेरिका और ईरान के बीच) |
इस घटना से पहले बहरीन ने भी 13 अप्रैल 2026 को इराकी अधिकारी को बुलाकर ड्रोन हमलों पर अपना विरोध जताया था। सऊदी अरब और अमेरिका ने भी हाल के हफ्तों में इराक में मिलिशिया की गतिविधियों पर चिंता व्यक्त की है। अरब संसद के अध्यक्ष मोहम्मद अहमद अल यमाही ने भी बुनियादी ढांचे और नागरिकों पर होने वाले इन हमलों की कड़ी निंदा की है।