UAE के डिप्टी प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री H.H. Sheikh Abdullah bin Zayed Al Nahyan ने लेबनान के प्रधानमंत्री डॉ नवाफ सलाम के साथ फोन पर बातचीत की। इस कॉल के दौरान दोनों नेताओं ने आपसी रिश्तों को और बेहतर बनाने और लेबनान में शांति लाने के तरीकों पर चर्चा की। खास तौर पर लेबनान और इसराइल के बीच हुए हालिया समझौते पर UAE ने अपनी सकारात्मक राय रखी।

शेख अब्दुल्ला ने लेबनान और इसराइल सरकार के बीच हुए उस ढांचे वाले समझौते (Framework Agreement) का स्वागत किया, जिसे अमेरिका की मदद से तैयार किया गया था। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता बढ़ाने के लिए यह एक अच्छा कदम है। UAE ने लेबनान की एकता, संप्रभुता और वहां के लोगों की खुशहाली के लिए अपना पूरा समर्थन दिया।

क्या है इसराइल और लेबनान के बीच हुआ समझौता

यह समझौता 26 जून 2026 को वाशिंगटन डी.सी. में हुआ था। इसमें अमेरिका, इसराइल और लेबनान तीनों शामिल हैं। इस डील का मुख्य मकसद युद्ध को पूरी तरह खत्म करना और दोनों देशों के बीच शांतिपूर्ण रिश्ते बनाना है। समझौते की कुछ मुख्य बातें इस प्रकार हैं:

  • लेबनान की सेना (LAF) अपनी पूरी जमीन पर सरकारी नियंत्रण वापस लेगी।
  • शर्त यह है कि गैर-सरकारी सशस्त्र समूहों (Hezbollah) के हथियारों को खत्म किया जाएगा।
  • इसके बाद ही इसराइल की सेना (IDF) धीरे-धीरे लेबनान की जमीन से बाहर निकलेगी।
  • समझौते को लागू करने के लिए अमेरिका की मदद से एक सैन्य समन्वय समूह (MCG4L) बनाया गया है।
  • दक्षिण लेबनान में कुछ ‘पायलट ज़ोन’ बनाए जाएंगे, जहां से इसराइल की सेना हटेगी और लेबनान की सेना तैनात होगी।

अमेरिका की मदद और अन्य देशों का कहना

इस शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए अमेरिका ने 100 मिलियन डॉलर की मानवीय सहायता देने का वादा किया है। साथ ही, लेबनान की सेना की क्षमताओं को बढ़ाने के लिए 30 मिलियन डॉलर से ज्यादा की राशि दी जाएगी।

अमेरिका के विदेश मंत्री Marco Rubio ने इसे एक साहसी फैसला बताया और कहा कि यह लेबनान की संप्रभुता वापस लाने की शुरुआत है। इसराइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने कहा कि यह समझौता ईरान के लिए एक बड़ा झटका है, लेकिन उन्होंने साफ किया कि जब तक हिजबुल्लाह के हथियार खत्म नहीं होते, इसराइल अपनी सुरक्षा के लिए कदम उठाता रहेगा।

लेबनान की स्थिति और विरोध

लेबनान के प्रधानमंत्री डॉ नवाफ सलाम ने कहा कि इस समझौते का मकसद अपनी पूरी जमीन से इसराइल की सेना को हटाना और राज्य की संप्रभुता बहाल करना है। उन्होंने साफ किया कि लेबनान में केवल कानूनी सेना को ही हथियार रखने का हक है।

दूसरी ओर, हिजबुल्लाह ने इस समझौते को पूरी तरह खारिज कर दिया है। 27 जून 2026 को बेरूत में हिजबुल्लाह के समर्थकों ने सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया और रास्ते जाम कर दिए। हिजबुल्लाह के एक अधिकारी ने चेतावनी दी कि इस वजह से गृहयुद्ध जैसी स्थिति बन सकती है।

Sushma Kumari

Shushma covers Stories Around Expats and Helpful Contents Related to Daily life of Public. She completed Mass Communication Degree From Makhan lal Chaturvedi College Bhopal and Has 3 years of Field Experience. Earlier She Worked with Jagran Media Patna Office and Now Working with GulfHindi.com