ईरान के हमलों के बाद UAE ने अपने पड़ोसी देशों के रवैये पर गहरी हैरानी जताई है। UAE के एक बड़े अधिकारी ने कहा कि जब ईरान ने हमले किए, तब खाड़ी देशों की तरफ से मिली प्रतिक्रिया इतिहास की सबसे कमजोर प्रतिक्रिया थी। अब सरकार का मानना है कि ईरान से निपटने के पुराने तरीके पूरी तरह फेल हो चुके हैं और अब नई रणनीति बनाने की जरूरत है।

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UAE के राष्ट्रपति के राजनयिक सलाहकार Anwar Gargash ने 28 अप्रैल 2026 को GCC देशों सहित अन्य खाड़ी देशों की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि ईरान के जवाबी हमलों पर जिस तरह से एकजुट होकर काम नहीं किया गया, वह वाकई हैरान करने वाला था।

हमलों का सिलसिला और UAE की तैयारी

यह पूरा विवाद फरवरी 2026 में शुरू हुआ था, जब अमेरिका और इसराइल ने ईरान पर हमले किए और फिर ईरान ने पलटवार किया। 10 मार्च 2026 को ईरान ने UAE की तरफ 15 बैलिस्टिक मिसाइल और 18 ड्रोन दागे, जिनमें से ज्यादातर को UAE के डिफेंस सिस्टम ने हवा में ही रोक दिया था। 4 मई को भी फिर से हमले हुए, जिसमें ईरान से आईं 4 क्रूज मिसाइलों में से 3 को सफलतापूर्वक मार गिराया गया।

UAE की राज्य मंत्री Lana Nusseibeh ने इस बात पर दुख जताया कि ईरान ने हमले किए। उन्होंने बताया कि वह खुद इस विवाद से दो हफ्ते पहले बातचीत के लिए तेहरान गई थीं और तब उन्हें ऐसा कोई संकेत नहीं मिला था कि UAE उनके निशाने पर है।

क्षेत्रीय तनाव और गुप्त डील की खबरें

मई के महीने में BRICS की बैठक के दौरान UAE के मंत्री Khalifa bin Shaheen Al-Marar ने ईरान के हमलों को ‘आतंकी हमला’ करार दिया। उन्होंने साफ किया कि UAE अपनी सुरक्षा करने में पूरी तरह सक्षम है और जरूरत पड़ने पर कानूनी और सैन्य कदम उठा सकता है। जून की शुरुआत में जब ईरान ने कुवैत और बहरीन पर मिसाइल हमले किए, तब UAE ने सभी खाड़ी देशों से एक सुर में जवाब देने की अपील की।

हालांकि, 13 जून 2026 को ऐसी खबरें आईं कि UAE और ईरान के बीच तनाव कम करने के लिए एक गुप्त समझौता हुआ है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, UAE ईरान की जमी हुई अरबों डॉलर की संपत्ति छोड़ने की तैयारी में है, और बदले में ईरान ने UAE पर मिसाइल और ड्रोन हमले रोकने का वादा किया है।