UAE ने ईरान के साथ किया व्यापार खत्म, अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रम्प ने शुरू किया बड़ा आर्थिक युद्ध.

अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने बुधवार, 19 अगस्त 2026 को ईरान के खिलाफ अब तक के सबसे कड़े आर्थिक अभियान का ऐलान किया है। इस नई कार्रवाई का मकसद ईरान की अर्थव्यवस्था को पूरी तरह से घेरना और उसे अलग-थलग करना है। अमेरिकी प्रशासन ने साफ चेतावनी दी है कि जो भी देश, बैंक, कंपनियां या सरकारी संस्थान ईरान की मदद करेंगे, उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा। इस अभियान के तहत तेल की तस्करी, पैसों के लेनदेन, एक्सचेंज हाउस और फर्जी कंपनियों पर कड़ी नजर रखी जाएगी ताकि ईरान कभी परमाणु हथियार हासिल न कर सके।
हॉर्मूज जलडमरूमध्य में तनाव और अमेरिकी नौसेना की सख्ती
हॉर्मूज जलडमरूमध्य में पहले से ही तनाव काफी बढ़ा हुआ है और वहां अमेरिकी नौसेना की नाकाबंदी अभी भी जारी है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, 19 अगस्त तक अमेरिकी बलों ने कुल 65 कमर्शियल जहाजों का रास्ता बदला है, 3 जहाजों को निष्क्रिय किया है और जांच के लिए 2 जहाजों पर बोर्डिंग की है। अमेरिकी सेना ओमान की तरफ से एक शिपिंग कॉरिडोर चला रही है, जहां अमेरिकी लड़ाकू विमानों की सुरक्षा में रोजाना लगभग 1 करोड़ बैरल तेल ले जाया जा रहा है। एक अमेरिकी अधिकारी ने पुष्टि की है कि सेना अब जलडमरूमध्य के दक्षिणी हिस्से को कंट्रोल कर रही है ताकि ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के प्रभाव को कम किया जा सके।
संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और ईरान का रुख
इस पूरे घटनाक्रम के बाद क्षेत्रीय स्तर पर बड़े फैसले लिए गए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति और UAE के राष्ट्रपति Sheikh Mohammed bin Zayed के बीच बातचीत के बाद, संयुक्त अरब अमीरात ने ईरान के साथ सभी तरह के व्यापार और वित्तीय लेन-देन को पूरी तरह से निलंबित करने की घोषणा कर दी है। दूसरी तरफ, ईरानी सेना के चीफ ऑफ स्टाफ मेजर जनरल Ali Abdollahi ने फारस की खाड़ी के देशों को चेतावनी दी है कि अमेरिकी सेना की मदद करने का मतलब ईरान के खिलाफ चल रहे अभियानों में शामिल होना है। ईरानी संसद के स्पीकर Mohammad Bagher Ghalibaf ने कहा है कि जब तक अमेरिका नाकाबंदी नहीं हटाता, फंसा हुआ पैसा वापस नहीं देता और तेल प्रतिबंध खत्म नहीं करता, तब तक ईरान हॉर्मूज जलडमरूमध्य में जहाजों को निशाना बनाता रहेगा।
इस पूरी स्थिति की विस्तृत जानकारी आप ANI News पर देख सकते हैं। हालांकि राष्ट्रपति ट्रम्प ने पहले बातचीत रद्द होने की बात कही थी, लेकिन बुधवार को उन्होंने संकेत दिया कि भविष्य में बातचीत संभव हो सकती है। वहीं दूसरी ओर, ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने साफ कर दिया है कि तेहरान किसी भी दबाव में आकर बातचीत नहीं करेगा। इस बढ़ते तनाव का असर खाड़ी देशों में रह रहे प्रवासियों और वहां की व्यापारिक गतिविधियों पर भी साफ तौर पर देखने को मिल रहा है।