दमिश्क के बाहरी इलाके में मौजूद शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाह्यान फील्ड हॉस्पिटल में एक बहुत बड़ा कार्यक्रम शुरू हुआ है. इसमें UAE, सीरिया और यूरोप के विशेषज्ञ एक साथ आए हैं ताकि केमिकल, बायोलॉजिकल, रेडियोलॉजिकल और न्यूक्लियर जैसे खतरनाक खतरों से निपटने की तैयारी की जा सके. यह पहली बार है जब इन तीनों पक्षों ने मिलकर इस तरह की फील्ड फोरम का आयोजन किया है.
इस फोरम में कौन शामिल हुआ और क्या सिखाया गया?
इस कार्यक्रम में 500 से ज़्यादा हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स, इमरजेंसी मेडिकल टीमें, सिविल डिफेंस के कर्मचारी, पुलिस ऑफिसर और सिक्योरिटी टीम के लोग हिस्सा ले रहे हैं. इसमें खास तौर पर वर्चुअल लेक्चर, मेडिकल कोर्स और फील्ड वर्कशॉप आयोजित किए गए हैं. इसका मुख्य उद्देश्य UAE, सीरिया और यूरोप के एक्सपर्ट्स के बीच जानकारी साझा करने के लिए एक मजबूत सिस्टम बनाना और एक वैज्ञानिक प्लेटफॉर्म तैयार करना है.
‘Jaheziya Syria’ प्रोग्राम का क्या लक्ष्य है?
यह पूरा आयोजन ‘Jaheziya Syria’ नाम के एक बड़े मेडिकल ट्रेनिंग प्रोग्राम का हिस्सा है. इस प्रोग्राम के दूसरे चरण की शुरुआत 3 मई 2026 को हुई थी. इसका मकसद सीरिया की इमरजेंसी और आपदा प्रतिक्रिया क्षमता को बेहतर बनाना है. UAE के ज़ायेद गिविंग इनिशिएटिव के CEO आदिल अल शमरी अल अजमी ने बताया कि यह फोरम समय-समय पर सीरिया और UAE में आयोजित किया जाएगा ताकि इमरजेंसी मेडिसिन और सर्जरी जैसे विषयों में अनुभव साझा किया जा सके. इस प्रोग्राम के तहत अगले पांच सालों में करीब 10,000 स्वास्थ्य पेशेवरों को ट्रेनिंग देने का लक्ष्य रखा गया है.
सुरक्षा और कानूनी तैयारी पर क्या कहा गया?
UAE के अटॉर्नी जनरल डॉ. हमद सैफ अल शम्सी ने बताया कि ये प्रोग्राम न्याय और सुरक्षा संस्थानों को मजबूत करने के विजन का हिस्सा हैं. वहीं, UAE में यूरोपीय संघ की राजदूत लुसी बर्गर ने CBRN अपराधों से निपटने के लिए EU और UAE के बीच करीबी सहयोग पर जोर दिया. उन्होंने उम्मीद जताई कि इस तरह के प्रयास आने वाले समय में अन्य अरब देशों तक भी पहुंचेंगे.
Frequently Asked Questions (FAQs)
UAE-सीरिया-यूरोप फोरम का मुख्य उद्देश्य क्या है
इस फोरम का मकसद केमिकल, बायोलॉजिकल और न्यूक्लियर इमरजेंसी से निपटने के लिए एक्सपर्ट्स के बीच ज्ञान का आदान-प्रदान करना और एक वैज्ञानिक प्लेटफॉर्म बनाना है.
‘Jaheziya Syria’ प्रोग्राम के तहत कितनी ट्रेनिंग दी जाएगी
इस प्रोग्राम के जरिए अगले पांच सालों में करीब 10,000 स्वास्थ्य पेशेवरों को इमरजेंसी और आपदा प्रतिक्रिया के लिए ट्रेनिंग देने का लक्ष्य रखा गया है.
