UAE और यूक्रेन के बीच एक बड़ा व्यापार समझौता (CEPA) 1 जुलाई 2026 से आधिकारिक तौर पर लागू हो गया है। इस समझौते का मकसद दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और प्राइवेट सेक्टर के रिश्तों को मजबूत करना है। इससे न केवल सामानों का आना-जाना आसान होगा, बल्कि टैक्स में कटौती से बिजनेस करने वालों को बड़ा फायदा मिलेगा।

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इस समझौते के तहत यूक्रेन से आने वाले 97 प्रतिशत और UAE से यूक्रेन जाने वाले 99 प्रतिशत सामानों पर अब कोई कस्टम ड्यूटी यानी टैक्स नहीं लगेगा। यह फैसला तुरंत प्रभाव से लागू कर दिया गया है। UAE के विदेश व्यापार मंत्री Dr. Thani bin Ahmed Al Zeyoudi ने इसे एक ऐतिहासिक कदम बताया है, जिससे व्यापार के नए रास्ते खुलेंगे और निवेश के मौके बढ़ेंगे।

समझौते की समयसीमा और प्रक्रिया

दोनों देशों ने इस डील के लिए काफी समय तक तैयारी की थी। सबसे पहले 5 दिसंबर 2022 को इस समझौते की इच्छा जताई गई थी। इसके बाद 17 फरवरी 2025 को आधिकारिक तौर पर इस पर हस्ताक्षर हुए। यूक्रेन की संसद ने 26 फरवरी 2026 को इसे मंजूरी दी और राष्ट्रपति Volodymyr Zelenskyy ने 23 मार्च 2026 को इस कानून पर साइन किए, जिसके बाद यह 1 जुलाई को लागू हुआ।

आर्थिक फायदे और आंकड़े

इस डील से दोनों देशों की अर्थव्यवस्था को बड़ा फायदा होने की उम्मीद है। खासतौर पर नॉन-ऑयल ट्रेड को फिर से 2021 के स्तर पर ले जाने का लक्ष्य रखा गया है।

विवरण आंकड़े / जानकारी
UAE GDP में योगदान (2031 तक) $369 मिलियन
यूक्रेन GDP में योगदान (2031 तक) $874 मिलियन
कुल GDP में अनुमानित बढ़ोतरी $1 बिलियन
2025 में नॉन-ऑयल व्यापार $346.8 मिलियन
व्यापार का लक्ष्य (2021 का पीक) $904.4 मिलियन
यूक्रेन से UAE आने वाले टैक्स फ्री सामान 97%
UAE से यूक्रेन जाने वाले टैक्स फ्री सामान 99%

इन सेक्टरों को मिलेगा बढ़ावा

इस समझौते से कई अहम क्षेत्रों में काम बढ़ेगा। इनमें मुख्य रूप से ये सेक्टर शामिल हैं:

  • मेटल और फूड प्रोसेसिंग
  • वनस्पति तेल उत्पादन और खेती
  • ट्रांसपोर्ट, लॉजिस्टिक्स और कंस्ट्रक्शन
  • पारंपरिक और रिन्यूएबल एनर्जी
  • टेक्नोलॉजी और डिजिटल ट्रेड

इसके अलावा, UAE ने विदेशी मालिकाना हक के नियमों को आसान कर दिया है। अब यूक्रेन की कंपनियां कुछ खास सेक्टरों में 100 प्रतिशत पूंजी निवेश कर सकेंगी और फ्री इकोनॉमिक जोन में पूरी तरह मालिक बन सकेंगी। इससे यूक्रेन के युद्ध के बाद बुनियादी ढांचे के निर्माण और बंदरगाहों के विकास में निवेश बढ़ेगा।