संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में UAE ने समुद्री सुरक्षा को लेकर अपनी बात रखी है। राज्यमंत्री खलीफा शाहीन अल मरार ने साफ कहा कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही को सुरक्षित रखना बहुत ज़रूरी है। ईरान की हालिया हरकतों की वजह से अब पूरी दुनिया को मिलकर कदम उठाने की ज़रूरत है ताकि समुद्री रास्तों पर कोई खतरा न रहे।

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UAE ने UN में क्या मांग की?

28 अप्रैल 2026 को UNSC की खुली बहस में खलीफा शाहीन अल मरार ने कहा कि UAE अंतरराष्ट्रीय कानून को पूरी तरह मानता है। देश चाहता है कि समुद्री रास्तों पर सबका बराबर अधिकार हो और होर्मुज़ जलडमरूमध्य पूरी तरह खुला रहे। उन्होंने जोर देकर कहा कि ईरान की कार्रवाइयों ने यह साफ कर दिया है कि अब अकेले नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सामूहिक प्रयासों की ज़रूरत है ताकि नेविगेशन की स्वतंत्रता बनी रहे।

ईरान की हरकतों से कितना नुकसान हुआ?

रिपोर्ट्स के मुताबिक, 28 फरवरी 2026 से अब तक ईरान ने कम से कम 21 बार कमर्शियल जहाजों पर सीधे हमले किए हैं। इन हमलों में कई लोग घायल हुए हैं और करीब 20,000 नाविक वहां फंस गए हैं क्योंकि सुरक्षित रास्ता न होने के कारण वे बाहर नहीं निकल पा रहे हैं। इसी गंभीर स्थिति को देखते हुए 11 मार्च 2026 को UN सुरक्षा परिषद ने प्रस्ताव 2817 पारित किया था, जिसमें ईरान के इन हमलों और रास्ते बंद करने के फैसले को गैरकानूनी बताया गया था।

अन्य देशों का इस पर क्या स्टैंड है?

  • 27 अप्रैल 2026 को कई देशों के राजनयिकों ने मिलकर होर्मुज़ जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की मांग की।
  • बहरीन के विदेश मंत्री अब्दुललतीफ़ बिन राशिद अल-ज़यानी ने कई देशों की तरफ से साझा बयान दिया और UN के प्रस्ताव 2817 का समर्थन किया।
  • इंटरनेशनल मैरीटाइम ऑर्गनाइजेशन (IMO) ने भी ईरान की धमकियों और कमर्शियल जहाजों पर हमलों की कड़ी निंदा की है।
  • UAE ने UN चार्टर के चैप्टर VII का हवाला देते हुए रास्ता खोलने के लिए अधिकार मांगा था।

Frequently Asked Questions (FAQs)

होर्मुज़ जलडमरूमध्य को लेकर UAE की क्या चिंता है?

UAE की मुख्य चिंता समुद्री आवाजाही की आजादी है। ईरान द्वारा इस रास्ते को बंद करने और जहाजों पर हमले करने से वैश्विक व्यापार और नाविकों की सुरक्षा खतरे में पड़ गई है।

UN सुरक्षा परिषद का प्रस्ताव 2817 क्या है?

यह प्रस्ताव 11 मार्च 2026 को पारित किया गया था। इसमें ईरान द्वारा क्षेत्रीय देशों पर किए गए हमलों की निंदा की गई और होर्मुज़ जलडमरूमध्य को बंद करना गैरकानूनी बताया गया।