UAE की सुरक्षा एजेंसियों ने हथियार तस्करी के एक बहुत बड़े नेटवर्क को पकड़ा है. इस साजिश में मानवीय सहायता के नाम पर फर्जी कागजात बनाए गए थे ताकि एक प्राइवेट विमान को लैंडिंग की अनुमति मिल सके. जांच में पता चला कि विमान में मेडिकल सामान नहीं बल्कि भारी मात्रा में गोला-बारूद था जिसे सूडान भेजा जाना था.

मानवीय मदद के नाम पर क्या था खेल?

इस तस्करी के लिए फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया था. कागजों में यह दिखाया गया था कि विमान में सर्जिकल उपकरण और मेडिकल सहायता का सामान है. लेकिन जब जांच हुई तो उसमें करीब 50 लाख (5 मिलियन) राउंड 7.54 x 62 मिमी गोर्युनोव-प्रकार का गोला-बारूद मिला. इस खेप को पोर्ट सूडान भेजने की योजना थी. सुरक्षा एजेंसियों ने पिछले साल 30 अप्रैल को इस साजिश को नाकाम कर दिया था.

इस बड़े मामले में कौन-कौन है शामिल?

करीब एक साल की लंबी जांच के बाद अब इस मामले को अबू धाबी की स्टेट सिक्योरिटी कोर्ट में ले जाया गया है. इसमें शामिल मुख्य विवरण नीचे दिए गए हैं:

  • आरोपी: कुल 13 लोगों और UAE में रजिस्टर्ड 6 कंपनियों को कोर्ट में पेश किया गया है.
  • मुख्य नाम: सूडान की खुफिया एजेंसी के पूर्व प्रमुख सलाह घोष (Salah Gosh) और जनरल यासिर अल-अत्ता इस मामले में आरोपित हैं.
  • अन्य संलिप्तता: सूडान के सेना प्रमुख अब्देल फत्ताह अल-बुरहान की अध्यक्षता वाली एक समिति को भी इस खरीद व्यवस्था से जोड़ा गया है.

UAE सरकार और विदेश मंत्रालय का क्या कहना है?

UAE के अटॉर्नी जनरल डॉ. हमद अल शम्सी ने इस घटना को राज्य की सुरक्षा का गंभीर उल्लंघन बताया है. उन्होंने कहा कि कुछ लोगों ने UAE की जमीन का इस्तेमाल एक युद्धग्रस्त देश में अवैध सैन्य व्यापार के लिए केंद्र बनाने की कोशिश की. वहीं UAE के विदेश मंत्रालय (MoFA) ने साफ किया है कि वे अपने हवाई क्षेत्र और बंदरगाहों का दुरुपयोग रोकने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं. आरोपियों पर जालसाजी, अवैध तस्करी और अपराध की कमाई को वैध बनाने जैसे गंभीर आरोप लगे हैं.

Frequently Asked Questions (FAQs)

UAE में किस चीज की तस्करी पकड़ी गई?

मानवीय सहायता और मेडिकल उपकरणों के नाम पर लगभग 50 लाख राउंड 7.54 x 62 मिमी गोर्युनोव-प्रकार के गोला-बारूद की तस्करी पकड़ी गई.

इस मामले में कितने लोगों और कंपनियों पर कार्रवाई हुई है?

इस मामले में 13 व्यक्तियों और UAE में पंजीकृत 6 कंपनियों को अबू धाबी की स्टेट सिक्योरिटी कोर्ट में पेश किया गया है.