लेबनन और इसराइल के बीच एक बड़ा समझौता हुआ है जिसे अमेरिका ने अपनी मध्यस्थता से पूरा करवाया है। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने इस खबर का स्वागत किया है। UAE का मानना है कि इस डील से पूरे इलाके में शांति आएगी और माहौल बेहतर होगा।
समझौते की मुख्य बातें
यह समझौता 26 जून 2026 को वॉशिंगटन में हुआ। अमेरिका की मदद से पांच दौर की बातचीत के बाद इस फ्रेमवर्क डील पर साइन किए गए। इस समझौते का मुख्य मकसद लेबनन की संप्रभुता को वापस लाना और हिजबुल्लाह जैसे समूहों को निशस्त्र करना है। साथ ही आतंकी बुनियादी ढांचे को खत्म करने पर जोर दिया गया है।
डील के तहत इसराइल अपनी सेना को लेबनन के कब्जे वाले इलाकों से हटाएगा। इसके लिए दो पायलट प्रोजेक्ट शुरू किए जाएंगे और इन इलाकों की जिम्मेदारी लेबनन की सेना को सौंपी जाएगी। साथ ही वॉशिंगटन की मदद से लेबनन के लिए एक मिलिट्री कोऑर्डिनेशन ग्रुप भी बनाया जाएगा।
अमेरिका की भूमिका और आर्थिक मदद
इस समझौते को सफल बनाने में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और विदेश मंत्री मार्को रूबियो की अहम भूमिका रही। UAE ने इन दोनों के प्रयासों की तारीफ की है। मार्को रूबियो ने इस डील को एक नई शुरुआत बताया है।
अमेरिका ने इस मौके पर लेबनन के लिए 100 मिलियन डॉलर की मानवीय सहायता और लेबनन की सेना के लिए 30 मिलियन डॉलर की राशि देने का ऐलान किया है।
UAE और अन्य नेताओं के बयान
UAE के विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह समझौता क्षेत्रीय स्थिरता के लिए एक सकारात्मक कदम है। मंत्रालय ने लेबनन की एकता और उसकी सीमाओं की सुरक्षा का समर्थन किया है। UAE के राष्ट्रपति के राजनयिक सलाहकार अनवर गरगाश ने कहा कि लेबनन की स्थिरता के लिए राज्य का शासन मजबूत होना जरूरी है।
लेबनन के प्रधानमंत्री नवाफ सलाम ने इस समझौते को संप्रभुता की बहाली की ओर एक कदम बताया। उन्होंने साफ किया कि लेबनन में केवल कानूनी सेना ही हथियार रख सकती है। वहीं इसराइल के अमेरिकी राजदूत येचिएल लेइटर ने कहा कि अब दोनों देश शांति की दिशा में सही रास्ते पर चल रहे हैं।
