संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के एक बहुत बड़े फैसले का स्वागत किया है। 22 मई 2026 को विश्व स्वास्थ्य सभा में एक बेहद महत्वपूर्ण प्रस्ताव पास किया गया है, जिसमें आम नागरिकों और अस्पतालों जैसे जरूरी स्वास्थ्य ढांचों पर होने वाले हमलों की कड़ी निंदा की गई है। खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के सदस्य देशों और जॉर्डन द्वारा लाए गए इस प्रस्ताव को मंजूरी मिल गई है। संयुक्त अरब अमीरात ने साफ किया है कि आम लोगों और बुनियादी ढांचे को निशाना बनाना अंतरराष्ट्रीय नियमों का खुला उल्लंघन है और इसे तुरंत रोका जाना चाहिए।

WHO के इस नए प्रस्ताव में क्या खास है?

विश्व स्वास्थ्य संगठन की 79वीं बैठक 18 से 23 मई 2026 तक आयोजित की जा रही है। इसी बैठक में इस नए प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। जिनेवा में संयुक्त अरब अमीरात के स्थायी प्रतिनिधि जमाल अल मुशरख ने इस मुद्दे पर अपना बयान जारी किया है। इस प्रस्ताव के तहत कुछ महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं:

  • आम नागरिकों की सुरक्षा को हर हाल में प्राथमिकता दी जाएगी ताकि उन्हें किसी भी युद्ध या तनाव में निशाना न बनाया जाए।
  • अस्पतालों, स्वास्थ्य केंद्रों, एम्बुलेंस और डॉक्टरों को हमलों से पूरी तरह सुरक्षित रखा जाएगा।
  • दवाइयों, टीकों (Vaccines), साफ पीने के पानी और अन्य जरूरी चिकित्सा सामानों की उपलब्धता को बिना किसी बाधा के बनाए रखा जाएगा।
  • बिजली घरों, हवाई अड्डों और पानी के प्लांट जैसे जरूरी सार्वजनिक ठिकानों की सुरक्षा तय की जाएगी।

ईरान के हमलों और समुद्री रास्तों की सुरक्षा पर जताई चिंता

हाल के दिनों में खाड़ी देशों को लगातार सुरक्षा चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। 5 और 8 मई 2026 को संयुक्त अरब अमीरात ने अपनी हवाई सुरक्षा प्रणाली को चालू करके ईरान की ओर से दागे गए मिसाइलों और ड्रोनों को हवा में ही रोक दिया था। इन हमलों में कुछ लोग घायल भी हुए थे। इस प्रस्ताव में ऐसे हमलों की निंदा की गई है जिनसे आम लोगों की जान को खतरा पहुंचता है।

इसके साथ ही, स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज (Strait of Hormuz) में होने वाले तनाव के कारण दवाइयों, टीकों, खाने-पीने के सामान और ईंधन की सप्लाई रुकने की आशंका जताई गई है। WHO के महानिदेशक टेड्रोस अदनोम घेब्रेयेसस ने भी ईरान के भीतर स्वास्थ्य केंद्रों (जैसे पाश्चर इंस्टीट्यूट और तोफिघ दारू फार्मास्यूटिकल) पर हुए हालिया हमलों को लेकर चिंता जाहिर की है। इस प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य दुनिया भर में स्वास्थ्य सेवाओं पर होने वाले इन नुकसानों की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निगरानी करना और आम जनता को सुरक्षित रखना है।

Frequently Asked Questions (FAQs)

WHO में यह प्रस्ताव किस देश ने पेश किया था?

यह प्रस्ताव संयुक्त अरब अमीरात (UAE) समेत खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के सदस्य देशों (सऊदी अरब, बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर) और जॉर्डन द्वारा संयुक्त रूप से पेश किया गया था।

क्या इस प्रस्ताव में ईरान के हमलों का जिक्र किया गया है?

हाँ, प्रस्ताव में खाड़ी देशों और जॉर्डन पर ईरान की तरफ से किए गए ड्रोन और मिसाइल हमलों की निंदा की गई है, जिससे बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं और आम लोगों को नुकसान पहुंचा है।

प्रस्ताव का आम लोगों के जीवन पर क्या प्रभाव पड़ेगा?

इस प्रस्ताव के लागू होने से युद्ध या तनाव की स्थिति में भी अस्पतालों, बिजली-पानी की व्यवस्था और दवाओं की सप्लाई को बाधित नहीं किया जा सकेगा, जिससे आम जनता को जरूरी स्वास्थ्य सेवाएं मिलती रहेंगी।

Sushma Kumari

Shushma covers Stories Around Expats and Helpful Contents Related to Daily life of Public. She completed Mass Communication Degree From Makhan lal Chaturvedi College Bhopal and Has 3 years of Field Experience. Earlier She Worked with Jagran Media Patna Office and Now Working with GulfHindi.com