विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की 79वीं वर्ल्ड हेल्थ असेंबली में नागरिकों और स्वास्थ्य सुविधाओं पर होने वाले हमलों की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए एक बड़ा प्रस्ताव पास किया गया है। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने इस फैसले का खुलकर स्वागत किया है। जिनेवा में हुई इस बैठक में प्रस्ताव के पक्ष में रिकॉर्ड 91 वोट पड़े। दूसरी तरफ, इस प्रस्ताव के विरोध में केवल 2 देशों ने मतदान किया।

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प्रस्ताव में क्या नियम और फैसले लिए गए हैं?

यह प्रस्ताव 21 मई 2026 को जिनेवा में आयोजित 79वीं वर्ल्ड हेल्थ असेंबली के दौरान पास हुआ है। इसमें अस्पतालों, वॉटर डीसेलिनेशन प्लांट, बिजली घरों, हवाई अड्डों और बंदरगाहों जैसे नागरिक ढांचों पर हमलों की कड़े शब्दों में निंदा की गई है। प्रस्ताव में सदस्य देशों से 1949 के जिनेवा कन्वेंशन के तहत अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानूनों का पालन करने की अपील की गई है, जिससे अस्पतालों जैसी जगहों की सुरक्षा तय की जा सके।

यूएई और ईरान के बीच इस प्रस्ताव पर क्या राय है?

इस प्रस्ताव को खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) और जॉर्डन ने मिलकर तैयार किया था। यूएई के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान ने नागरिक ढांचों को निशाना बनाने को एक खतरनाक कदम और रेड लाइन बताया है। दूसरी तरफ, ईरान और निकारागुआ ने इस प्रस्ताव का विरोध किया है। ईरान के स्वास्थ्य मंत्री मोहम्मद-रेजा जफरकंडी ने बैठक में कहा कि उनके देश के 63 अस्पतालों और 195 स्वास्थ्य केंद्रों को नुकसान पहुंचा है, लेकिन उनके विरोध के बावजूद यह प्रस्ताव पास हो गया है।

वैश्विक स्वास्थ्य सप्लाई चेन पर असर

प्रस्ताव में इस बात पर जोर दिया गया है कि हमलों से ग्लोबल हेल्थ सप्लाई चेन प्रभावित होती है। महत्वपूर्ण दवाओं, टीकों और मेडिकल उपकरणों की सप्लाई सुरक्षित रहनी चाहिए। डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक टेड्रोस अधानोम गेब्रेयसस ने पहले भी कहा है कि किसी अस्पताल या स्कूल पर बमबारी करना कोई गलती नहीं, बल्कि युद्ध अपराध है।

Frequently Asked Questions (FAQs)

WHO का यह प्रस्ताव किस बारे में है और इसके पक्ष में कितने वोट पड़े?

यह प्रस्ताव नागरिकों, अस्पतालों और बंदरगाहों जैसे नागरिक ठिकानों पर हमलों की निंदा करता है। इसके पक्ष में 91 देशों ने वोट दिया और केवल 2 देशों (ईरान और निकारागुआ) ने इसका विरोध किया।

यूएई सरकार ने इस प्रस्ताव को लेकर क्या प्रतिक्रिया दी है?

यूएई के उप प्रधानमंत्री शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान ने कहा कि नागरिक सुविधाओं पर हमला एक खतरनाक कदम है और इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।