ईरान और इसराइल के बीच जारी युद्ध ने अब हवाई यात्रा को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। ब्रिटेन सरकार ने विमानन कंपनियों के लिए नए नियम लागू करने का फैसला किया है ताकि ईंधन की बचत की जा सके। अब अलग-अलग फ्लाइट्स के यात्रियों को एक ही प्लेन में बिठाया जा सकेगा, जिससे यात्रा के शेड्यूल में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
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ब्रिटेन सरकार ने फ्लाइट्स के लिए नया नियम क्यों बनाया?
मध्य पूर्व में चल रहे तनाव और ईरान युद्ध की वजह से जेट ईंधन (Jet Fuel) की किल्लत होने का डर है। Strait of Hormuz बंद होने से तेल की सप्लाई पर असर पड़ा है। इस समस्या से निपटने के लिए UK Department for Transport ने प्रस्ताव रखा है कि एयरलाइंस अब एक ही डेस्टिनेशन के लिए चलने वाली कई फ्लाइट्स को मिलाकर कम प्लेन चला सकें। इस कदम का मुख्य मकसद ईंधन बचाना और लगभग खाली रहने वाली ‘घोस्ट फ्लाइट्स’ को रोकना है। इस योजना पर 5 मई 2026 से इंडस्ट्री के साथ सलाह-मशविरा शुरू होगा।
यात्रियों और एयरलाइंस पर इसका क्या असर होगा?
Transport Secretary Heidi Alexander के मुताबिक, इस कानून से एयरलाइंस को समय रहते अपनी फ्लाइट्स में बदलाव करने की सुविधा मिलेगी। इससे यात्रियों और बिजनेस करने वालों को सुरक्षा मिलेगी और आखिरी समय पर फ्लाइट कैंसिल होने की समस्या कम होगी। Civil Aviation Authority (CAA) के चीफ रॉब बिशन ने बताया कि एयरपोर्ट स्लॉट्स के नियमों में ढील दी जाएगी ताकि एयरलाइंस को लचीलापन मिले। ब्रिटिश एयरवेज, वर्जिन अटलांटिक और ईजीजेट जैसी बड़ी कंपनियों ने भी इस पर चर्चा की है। जो लोग अक्सर विदेश यात्रा करते हैं या ब्रिटेन में रहने वाले प्रवासी हैं, उन्हें अपनी फ्लाइट के समय और शेड्यूल में बदलाव का सामना करना पड़ सकता है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
ब्रिटेन सरकार ने यह फैसला क्यों लिया?
ईरान युद्ध की वजह से तेल की सप्लाई और जेट ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है। ईंधन बचाने और फ्लाइट्स को पूरी तरह कैंसिल होने से रोकने के लिए यह फैसला लिया गया है।
क्या यात्रियों की फ्लाइट्स कैंसिल हो जाएंगी?
सरकार का मकसद फ्लाइट्स को पूरी तरह कैंसिल करने के बजाय उन्हें एक साथ जोड़ना है, ताकि कम विमानों में ज़्यादा यात्री जा सकें और यात्रा जारी रहे।