ब्रिटेन की सरकार ने एक बड़ा कदम उठाते हुए रूसी जेट फ्यूल और डीजल के आयात पर लगी पाबंदियों में ढील दे दी है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच युद्ध और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने की वजह से पूरी दुनिया में तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं। आम जनता को महंगाई से बचाने के लिए सरकार ने यह रास्ता चुना है।

UK सरकार ने यह कदम क्यों उठाया?

ब्रिटेन के ट्रेजरी मिनिस्टर Dan Tomlinson ने बताया कि यह बदलाव कुछ समय के लिए किया गया है। इसका मुख्य मकसद देश के नेशनल इंटरेस्ट को बचाना और अर्थव्यवस्था के लिए जरूरी जेट फ्यूल जैसे सामानों की सप्लाई को सुरक्षित रखना है। प्रधानमंत्री Keir Starmer ने साफ किया कि यह पुराने प्रतिबंधों को पूरी तरह हटाना नहीं है, बल्कि उपभोक्ताओं को महंगे ईंधन से बचाने के लिए एक टारगेटेड शॉर्ट-टर्म लाइसेंस देना है।

नियमों में क्या बदलाव हुए और किसने किया विरोध?

सरकार ने 20 मई 2026 से एक ट्रेड लाइसेंस जारी किया है। अब भारत और तुर्की जैसे तीसरे देशों में रिफाइन किए गए रूसी कच्चे तेल के आयात की अनुमति होगी। यह लाइसेंस फिलहाल अनिश्चित समय के लिए है लेकिन होम ऑफिस समय-समय पर इसकी जांच करेगा। इसके साथ ही रूसी प्लांट से आने वाले LNG के परिवहन के लिए 1 जनवरी 2027 तक का अस्थायी लाइसेंस भी दिया गया है।

इस फैसले के बाद ब्रिटेन में राजनीतिक बहस शुरू हो गई है। कंजर्वेटिव पार्टी की नेता Kemi Badenoch ने इसे गलत बताया और कहा कि सरकार गंदा रूसी तेल खरीदने का फैसला कर रही है। वहीं, Foreign Affairs Committee की चेयर Emily Thornberry ने कहा कि इस फैसले से यूक्रेन को बड़ा झटका लगेगा।

ईंधन की कीमतें और बाजार का हाल

ईरान संघर्ष के कारण यूरोपीय जेट फ्यूल की कीमतें दोगुनी से ज्यादा हो गई हैं। ब्रिटेन में सोमवार को अनलेडेड पेट्रोल की कीमत 152.52p प्रति लीटर तक पहुंच गई थी। कीमतों को कंट्रोल करने के लिए प्रधानमंत्री Keir Starmer ने फ्यूल ड्यूटी में होने वाली बढ़ोतरी को रद्द कर दिया है और 5p प्रति लीटर की कटौती को साल के अंत तक बढ़ा दिया है।

विवरण जानकारी
लागू होने की तारीख 20 मई 2026
LNG लाइसेंस की वैधता 1 जनवरी 2027 तक
पेट्रोल की कीमत (सोमवार) 152.52p प्रति लीटर
रिफाइनिंग देश भारत और तुर्की
ड्यूटी कटौती 5p प्रति लीटर (साल के अंत तक)

Frequently Asked Questions (FAQs)

UK ने रूस से तेल आयात की अनुमति क्यों दी?

अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच युद्ध और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने से ईंधन की कीमतें बहुत बढ़ गई थीं, जिससे सप्लाई चेन बचाने के लिए यह फैसला लिया गया।

क्या यह रूसी तेल पर से सभी प्रतिबंध हटा लिए गए हैं?

नहीं, यह केवल एक टारगेटेड शॉर्ट-टर्म लाइसेंस है जो भारत और तुर्की जैसे देशों में रिफाइन किए गए तेल के लिए है, पुराने प्रतिबंध अब भी लागू हैं।