UK ने इसराइल के वेस्ट बैंक सेटलमेंट प्रोजेक्ट का किया विरोध, विदेश मंत्री ने बुलाई आपात बैठक.

ब्रिटेन के विदेश मंत्री Ed Miliband ने इसराइल की सरकार द्वारा उठाए गए एक बड़े कदम पर कड़ी आपत्ति जताई है और इस फैसले को तुरंत वापस लेने की मांग की है। यह पूरा मामला इसराइल द्वारा वेस्ट बैंक के संवेदनशील इलाके में नई बस्तियां बसाने से जुड़ा हुआ है जिसे लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव काफी बढ़ गया है। ब्रिटेन सरकार ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए इसराइली अधिकारियों को तलब किया है और साफ कर दिया है कि इस तरह के कदम क्षेत्रीय शांति के लिए ठीक नहीं हैं।
वेस्ट बैंक में नई बस्तियों के निर्माण पर विवाद
प्राप्त जानकारी के अनुसार, इसराइली सरकार ने 19 अगस्त 2026 को वेस्ट बैंक के E1 सेटलमेंट प्रोजेक्ट के तहत टेंडर जारी करने का फैसला लिया था। इस योजना के तहत इलाके में 1,234 नए आवासों का निर्माण किया जाना है। माले अदुमिम के मेयर Guy Yifrach ने इसे शुरुआती चरण में 1,400 यूनिट्स लाने की योजना का हिस्सा बताया है। इस प्रोजेक्ट के लिए बोली लगाने की अंतिम तारीख 19 अक्टूबर 2026 तय की गई है, जो कि ठीक उस समय के आसपास है जब इसराइल में आगामी संसदीय चुनाव होने वाले हैं। चुनाव से ठीक पहले इस तरह के बड़े प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने के फैसले से राजनीतिक हलकों में भी चर्चाएं तेज हो गई हैं।
ब्रिटेन सरकार का कड़ा रुख और तलब
इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए ब्रिटिश विदेश मंत्री Ed Miliband ने इसराइली विदेश मंत्री Gideon Sa'ar के साथ औपचारिक संपर्क साधा है। उन्होंने इसराइल से तुरंत E1 योजनाओं को रोकने, टेंडर को रद्द करने और बस्तियों के विस्तार को पूरी तरह बंद करने की मांग की है। इसके अलावा, ब्रिटेन के विदेश, राष्ट्रमंडल और विकास कार्यालय ने ब्रिटेन में इसराइल की चार्ज डी अफेयर्स Daniela Grudsky Ekstein को भी तलब किया। इस मुलाकात के दौरान ब्रिटेन ने नेतान्याहू सरकार के इन कदमों पर अपनी गहरी नाराजगी दर्ज कराई। UK Government Official Statement के अनुसार, ब्रिटेन का मानना है कि इस तरह की बस्तियां अंतरराष्ट्रीय कानून का खुला उल्लंघन हैं और दो-देशीय समाधान की संभावनाओं को गंभीर नुकसान पहुंचाती हैं क्योंकि इससे वेस्ट बैंक का इलाका पूर्वी यरुशलम से कट जाएगा।
संभावित प्रतिबंध और मानवाधिकार चेतावनी
ब्रिटिश विदेश मंत्री ने आने वाले हफ्तों में ब्रिटेन की तरफ से कई सख्त कदम उठाने की बात कही है। सरकार उन नीतियों और संस्थाओं को निशाना बनाते हुए प्रतिबंध लगाने की तैयारी कर रही है जो बस्तियों के विस्तार में शामिल हैं। दूसरी ओर, मानवाधिकार संगठन ह्यूमन राइट्स वॉच ने भी इस मामले में चेतावनी जारी की है। संगठन ने साफ किया है कि जो भी व्यवसाय इस E1 प्रोजेक्ट के लिए बोली लगाएंगे, वे संभावित युद्ध अपराधों में सहभागिता के जोखिम का सामना कर सकते हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस प्रोजेक्ट का विरोध लगातार बढ़ता जा रहा है और आने वाले दिनों में इस पर कई और राजनीतिक व कूटनीतिक फैसले देखने को मिल सकते हैं।