दुनिया के सबसे ज़रूरी समुद्री रास्तों में से एक Hormuz Strait को फिर से खोलने के लिए ब्रिटेन और फ्रांस ने कमर कस ली है। इसके लिए लंदन में एक बड़ी मीटिंग हुई जिसमें 30 से ज़्यादा देशों के सैन्य अधिकारी शामिल हुए। दोनों देशों के रक्षा मंत्रियों ने भरोसा जताया है कि इस रास्ते को फिर से शुरू करने में कामयाबी मिलेगी जिससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार में फिर से तेजी आएगी।

रास्ता खोलने का प्लान क्या है और कब लागू होगा

ब्रिटेन के रक्षा मंत्री John Healey और फ्रांस की मंत्री Catherine Vautrin ने एक साझा बयान में कहा कि राजनयिक कोशिशों को अब धरातल पर उतारने का समय आ गया है। उन्होंने बताया कि इस मिशन का मुख्य मकसद मर्चेंट जहाजों की सुरक्षा करना और समुद्र से बारूदी सुरंगें (mines) हटाना होगा। यह मिशन पूरी तरह से रक्षात्मक होगा और इसका संचालन तभी शुरू किया जाएगा जब अमेरिका और ईरान के बीच एक टिकाऊ युद्धविराम (ceasefire) समझौता हो जाएगा।

ईरान और अमेरिका के बीच विवाद की असली वजह

ईरान ने साफ कर दिया है कि जब तक अमेरिका उसके बंदरगाहों की नाकाबंदी नहीं हटाता, तब तक वह Hormuz Strait नहीं खोलेगा। ईरान की Revolutionary Guard Corps (IRGC) ने 4 मार्च 2026 को इस रास्ते पर अपना पूरा कंट्रोल जताया था और कहा था कि बिना उनकी इजाजत कोई जहाज नहीं गुजर सकेगा। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने आदेश दिया है कि जो भी ईरानी जहाज समुद्र में सुरंगें बिछाने की कोशिश करेंगे, उन्हें नष्ट कर दिया जाएगा।

हालिया हमले और व्यापार पर असर

पिछले कुछ दिनों में तनाव काफी बढ़ गया है। 22 अप्रैल 2026 को ईरान ने दो कंटेनर जहाजों को पकड़ लिया और एक तीसरे जहाज पर हमला किया। इससे ठीक पहले 20 अप्रैल को अमेरिकी सेना ने एक ईरानी जहाज को अपने कब्जे में लिया था। अगर यह समुद्री रास्ता बंद रहता है, तो ग्लोबल शिपिंग और तेल की सप्लाई पर बुरा असर पड़ेगा, जिसका सीधा असर आम लोगों के लिए सामान की कीमतों और खर्चों पर पड़ सकता है।

Sushma Kumari

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