UK PM Keir Starmer का बड़ा बयान, खाड़ी संकट में नहीं शामिल होगा ब्रिटेन, Strait of Hormuz को खोलने की कोशिश तेज़

Aanya1 April 20262 min read25 viewsFinance

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री Keir Starmer ने पश्चिम एशिया में जारी संकट पर अपना रुख साफ कर दिया है। उन्होंने कहा है कि यह युद्ध उनका युद्ध नहीं है और ब्रिटेन इस संघर्ष में शामिल नहीं होगा। प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि उनका पूरा ध्यान अब तनाव कम करने और Strait of Hormuz को फिर से खुलवाने पर है। अप्रैल 1, 2026 को दिए अपने बयान में उन्होंने बताया कि युद्ध का असर भले ही दुनिया पर हो, लेकिन ब्रिटेन के पास इस संकट से सुरक्षित बाहर निकलने और देश की सुरक्षा बनाए रखने की पूरी योजना है।

Strait of Hormuz को लेकर ब्रिटेन की क्या है योजना?

प्रधानमंत्री ने घोषणा की है कि ब्रिटेन इस हफ्ते एक अंतरराष्ट्रीय राजनयिक सम्मेलन की मेजबानी करेगा। इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य Strait of Hormuz को दोबारा पूरी तरह से खोलना और समुद्री रास्तों को सुरक्षित बनाना है। सम्मेलन से जुड़ी मुख्य बातें नीचे दी गई हैं:

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  • इस बैठक की अगुवाई ब्रिटेन की Foreign Secretary Yvette Cooper करेंगी।
  • अब तक 35 देशों ने समुद्री सुरक्षा बहाल करने के लिए साथ काम करने का भरोसा दिया है।
  • सरकार का मानना है कि कूटनीतिक बातचीत के जरिए ही ऊर्जा सुरक्षा और महंगाई जैसी समस्याओं को सुलझाया जा सकता है।
  • चीन और पाकिस्तान ने भी एक साझा बयान जारी कर फंसे हुए जहाजों और चालक दल की सुरक्षा की मांग की है।

अमेरिका और अन्य देशों का इस मामले पर रुख

अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने संकेत दिया है कि उनका सैन्य अभियान अगले दो से तीन हफ्तों में खत्म हो सकता है। उन्होंने यह भी कहा है कि अब Strait of Hormuz की सुरक्षा की जिम्मेदारी उन देशों को लेनी चाहिए जो तेल और शिपिंग के लिए इस पर निर्भर हैं। उधर, ईरान के विदेश मंत्रालय का कहना है कि उन्होंने रास्ता बंद नहीं किया है, लेकिन वे कुछ खास देशों के जहाजों पर पाबंदी लगा सकते हैं। संयुक्त राष्ट्र के महासचिव Antonio Guterres ने भी पहले ही शांति और समुद्री रास्ते को सुरक्षित रखने की अपील की थी।

देश/संस्था मुख्य घोषणा/स्थिति
ब्रिटेन (UK) 35 देशों के साथ मिलकर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन बुलाएगा।
अमेरिका (US) 2-3 हफ्तों में सैन्य अभियान खत्म करने का संकेत।
ईरान (Iran) गैर-आक्रामक देशों के जहाजों के लिए रास्ता खुला होने का दावा।
चीन-पाकिस्तान जहाजों के सुरक्षित आवागमन और रास्ता खोलने की साझा मांग।
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