ईरान और ब्रिटेन के बीच तनाव काफी बढ़ गया है। ब्रिटेन की विदेश मंत्री Yvette Cooper ने साफ कहा है कि ईरान दुनिया की अर्थव्यवस्था को बंधक नहीं बना सकता। Strait of Hormuz पर नियंत्रण को लेकर ब्रिटेन अब ईरान पर दबाव बना रहा है ताकि दुनिया भर में तेल और जरूरी सामान की सप्लाई न रुके और आम लोगों को महंगाई का सामना न करना पड़े।

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UK ने ईरान से क्या मांग की है और क्यों

ब्रिटेन के मंत्री Stephen Doughty ने UN Security Council की बैठक में इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया। उन्होंने कहा कि ईरान को वैश्विक अर्थव्यवस्था को खतरे में डालने का हक नहीं है। ब्रिटेन ने अंतरराष्ट्रीय कानूनों का हवाला देते हुए कुछ मुख्य बातें रखी हैं:

  • Strait of Hormuz को बिना किसी शर्त के पूरी तरह खोला जाना चाहिए।
  • समुद्र में जहाजों के आने-जाने की आजादी होनी चाहिए और अंतरराष्ट्रीय रास्तों पर कोई टोल या परमिशन का चक्कर नहीं होना चाहिए।
  • ब्रिटेन ने स्पष्ट किया कि वह अमेरिका द्वारा लगाए गए नाकेबंदी (blockade) का समर्थन नहीं करता, लेकिन रास्ते खोलने के लिए अमेरिका और अन्य देशों के साथ मिलकर काम कर रहा है।

ईरान का क्या कहना है और दुनिया पर क्या असर होगा

इस विवाद पर ईरान ने अपनी शर्तें रखी हैं और अमेरिका पर आरोप लगाए हैं। वहीं अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने भी अपनी राय दी है:

  • ईरान की शर्त: ईरान ने कहा कि वह रास्ता तब खोलेगा जब अमेरिका उस पर लगी नाकेबंदी हटाएगा और चल रही जंग को खत्म करेगा।
  • ईरान का आरोप: ईरान के विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी सेना द्वारा ईरानी जहाजों को पकड़ने को समुद्री डकैती और लूटपाट बताया।
  • महंगाई का खतरा: Yvette Cooper ने चेतावनी दी कि Strait of Hormuz बंद होने से ईंधन, भोजन और खाद की किल्लत होगी, जिसका असर आने वाले कई महीनों तक रहेगा।
  • IMO का फैसला: अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) के प्रमुख Arsenio Dominguez ने कहा कि जहाजों से कोई फीस लेने का कोई कानूनी आधार नहीं है।
  • जर्मनी की राय: जर्मन चांसलर Friedrich Merz ने अमेरिका की आलोचना की और कहा कि बिना किसी साफ रणनीति के ईरान युद्ध में पड़ने से मामला और उलझ गया है।