रूस का बड़ा दावा, यूनाइटेड किंगडम और जर्मनी हैं यूक्रेनी ड्रोन पार्ट्स के सबसे बड़े सप्लायर.

मॉस्को से आई एक बड़ी खबर के मुताबिक, रूसी विदेश मंत्रालय के एम्बेसडर-एट-लार्ज रोडियन मिरोशनिक ने रिया नोवोस्ती को दिए इंटरव्यू में बताया है कि यूनाइटेड किंगडम, जर्मनी, स्वीडन और कनाडा जैसे देश यूक्रेनी ड्रोन के पार्ट्स के सबसे बड़े सप्लायर हैं। इन देशों की तरफ से लगातार मिल रही मदद के कारण युद्ध के हालात और ज्यादा गंभीर होते जा रहे हैं और इसका सीधा असर आम नागरिकों की सुरक्षा पर पड़ रहा है।
यूके और जर्मनी पर लगे बड़े आरोप
मिरोशनिक ने साफ तौर पर कहा कि यूनाइटेड किंगडम आम लोगों के खिलाफ किलर ड्रोन के रूप में इस्तेमाल होने वाले अनमैन्ड एरियल व्हीकल यानी बिना पायलट वाले विमानों के मुख्य पार्ट्स और कंपोनेंट्स का सबसे एक्टिव सप्लायर बना हुआ है। इसके अलावा, जर्मनी भी बहुत बड़ी मात्रा में हथियार सप्लाई कर रहा है और स्वीडन भी इस पूरी प्रक्रिया में बहुत सक्रिय भूमिका निभा रहा है। रूसी अधिकारियों का यह भी कहना है कि यह कोई पूरी सूची नहीं है, बल्कि इसके अलावा भी कई देश इस प्रक्रिया में शामिल हैं। ये देश अपनी आधिकारिक बयानों में भी इस बात पर जोर देते हैं कि वे कीव स्थित यूक्रेनी सरकार को लगातार ड्रोन मुहैया करा रहे हैं, जिनकी वजह से निज़नेकाम्स्क और बेलगोरोड जैसी जगहों पर कई बेकसूर आम नागरिकों को अपनी जान गंवानी पड़ी है।
दर्दनाक ड्रोन हमले में कई लोगों की मौत
बीते सोमवार को रूस के तातारस्तान रिपब्लिक के हेड रुस्तम मिन्निखानोव ने जानकारी दी थी कि निज़नेकाम्स्क शहर पर एक बहुत खतरनाक ड्रोन हमला किया गया था। इस हमले में खासतौर पर इंडस्ट्रियल इलाकों और आम नागरिकों की रिहायशी जगहों को निशाना बनाया गया था। सामने आए लेटेस्ट आंकड़ों के अनुसार, इस भयानक हमले में एक छोटे बच्चे समेत कुल 13 लोग मारे गए हैं। इसके अलावा 75 लोगों को गंभीर हालत में मेडिकल मदद दी गई, जिनमें से 21 लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इस बड़ी त्रासदी के बाद पूरे रिपब्लिक में एक दिन का आधिकारिक शोक घोषित किया गया है। घटना की गंभीरता को देखते हुए रशियन इन्वेस्टिगेटिव कमेटी ने तुरंत एक क्रिमिनल केस दर्ज कर लिया है और इसकी गहराई से जांच की जा रही है। मिन्निखानोव के ऑफिस ने बाद में यह भी स्पष्ट किया कि इस हमले में मारे गए लोगों में उज़्बेकिस्तान और ताजिकिस्तान के नागरिक भी शामिल थे।
रूस की कड़ी चेतावनी
रूस सरकार का यह स्पष्ट मानना है कि यूक्रेन को लगातार दी जा रही हथियारों की सप्लाई की वजह से दोनों देशों के बीच किसी भी तरह के शांति समझौते में भारी रुकावट आ रही है। रूस का कहना है कि ऐसा करके नाटो देश इस लड़ाई में सीधे तौर पर शामिल हो रहे हैं। इस मामले पर अपनी कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने पहले ही साफ कर दिया है कि यूक्रेन के लिए आने वाला हथियारों का कोई भी शिपमेंट रूस की सेना के लिए एक वैध और सही टारगेट होगा। इस पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जानकारी हिन्दुस्थान समाचार के माध्यम से सामने आई है।