रूस के साथ युद्ध में यूक्रेन की हालत खराब, अमेरिकी पैट्रियट इंटरसेप्टर हुए खत्म

रूस के साथ चल रहे लंबे युद्ध के बीच यूक्रेन की वायु रक्षा प्रणाली पूरी तरह से असहाय नजर आ रही है। स्थिति यह बन चुकी है कि यूक्रेन के पास अब रूसी बैलिस्टिक मिसाइलों को आसमान में ही रोकने के लिए अमेरिकी पैट्रियट इंटरसेप्टर न के बराबर बचे हैं। यह हथियार दुनिया भर में अपनी रक्षात्मक क्षमता के लिए सबसे ज्यादा मांग में बना हुआ है और अमेरिका में निर्मित इस डिफेंस सिस्टम से कई देश अपनी सीमाओं को सुरक्षित करने का प्रयास कर रहे हैं। अमेरिकी मीडिया संस्थान CNN ने अपनी ग्राउंड रिपोर्ट में यूक्रेन के एक अज्ञात क्षेत्र में मक्के के खेत के बीच पैट्रियट इंटरसेप्टर को पूरी तरह बेकार हालत में दिखाया है, जिसके कैनिस्टर खाली पड़े हैं और जिन्हें आखिरी बार करीब 10 हफ्ते पहले इस्तेमाल किया गया था।
यूक्रेन के वायु रक्षा इंजीनियर का दर्द
यूक्रेनी वायु रक्षा प्रणाली के मुख्य इंजीनियर दमित्रो ने मीडिया से बातचीत में अपनी बेबसी जाहिर करते हुए बताया कि उन्होंने पिछले छह हफ्तों से इस पैट्रियट लॉन्चर को सक्रिय रूप से चलते हुए नहीं देखा है। उन्होंने इस स्थिति को बेहद दिल तोड़ने वाला करार दिया जब देश के पास रक्षा उपकरण तो मौजूद हैं, लेकिन उनका उपयोग करके किसी भी आने वाली मिसाइल को हवा में नेस्तनाबूद नहीं किया जा सकता। दुश्मन की बैलिस्टिक मिसाइलें लगातार नागरिकों और ठिकानों के सिर के ऊपर से गुजर रही हैं और यूक्रेन के सैनिक चाहकर भी उनके खिलाफ कुछ नहीं कर पा रहे हैं। यूक्रेनी अधिकारियों के मुताबिक यह गंभीर संकट मुख्य रूप से दिसंबर 2025 के बाद से लगातार बना हुआ है, जिससे देश की सुरक्षा पूरी तरह खतरे में आ गई है।
राष्ट्रपति जेलेंस्की की मांग और वैश्विक उत्पादन संकट
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की का कहना है कि आने वाली सर्दियों के मौसम में रूस के साथ जारी इस भीषण संघर्ष में टिके रहने के लिए उन्हें अमेरिका के कुल स्टॉक का कम से कम 5 प्रतिशत हिस्सा चाहिए, जबकि वर्तमान समय में उनके पास केवल 1 प्रतिशत ही बचा है। पैट्रियट इंटरसेप्टर की आपूर्ति में यह वैश्विक संकट इसलिए पैदा हुआ क्योंकि इस साल मार्च और अप्रैल के दौरान खाड़ी देशों में इनका बहुत अधिक इस्तेमाल किया गया था। Foreign Policy Research Institute की एक रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के साथ संघर्ष के शुरुआती चार दिनों के दौरान गठबंधन सेनाओं ने औसतन हर दिन 225 इंटरसेप्टर खर्च किए थे। इन्हें बनाने वाली प्रमुख कंपनी Lockheed Martin ने वर्ष 2025 में कुल 620 इंटरसेप्टर का निर्माण किया, जो प्रतिदिन औसतन 1.7 बैठता है, और इसी वजह से हथियारों के वास्तविक इस्तेमाल और उनके उत्पादन के बीच 132 और 1 का बहुत बड़ा अंतर आ गया है। पेंटागन ने स्थिति को सुधारने के लिए जनवरी में लॉकहीड मार्टिन के साथ सात साल का एक बड़ा समझौता किया था ताकि 2030 तक हर साल करीब 2,000 इंटरसेप्टर बनाए जा सकें, लेकिन तब तक इस युद्ध को चलते हुए पूरे आठ साल हो चुके होंगे।
स्थानीय निर्माण का प्रस्ताव और राजनीतिक अनिश्चितता
यह बात अभी तक पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो पाई है कि अमेरिका ने असल में यूक्रेन को कितने इंटरसेप्टर देने का वादा किया है या वर्तमान में अमेरिकी सैन्य भंडारों में कुल कितना स्टॉक मौजूद है। राष्ट्रपति जेलेंस्की ने अपने एक इंटरव्यू में खुलासा किया था कि उन्होंने अमेरिकी रक्षा कंपनियों Raytheon और लॉकहीड मार्टिन को यूक्रेन के भीतर ही इंटरसेप्टर निर्माण करने वाले किसी भी प्लांट का पूरा मालिकाना हक और नियंत्रण सौंपने का सीधा प्रस्ताव दिया था। उन्होंने अमेरिकी कंपनियों के प्रबंधकों से कहा था कि यह उनकी अपनी कंपनी होगी जिसमें दिमाग, हाथ और इंजीनियर यूक्रेन के होंगे और वे इसे एक बेहतरीन उत्पादन इकाई बनाने में पूरा सहयोग करेंगे ताकि किसी अन्य देश को बेचने के बजाय सीधे अपने देश की रक्षा के लिए हथियार मिल सकें।
इसी साल जून के महीने में अंकारा में आयोजित नाटो शिखर सम्मेलन के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने यूक्रेन को इन मिसाइलों के निर्माण के लिए लाइसेंस देने का एक संभावित प्रस्ताव रखा था। इसके बाद रेथियॉन और लॉकहीड मार्टिन की उच्च स्तरीय टीमें राष्ट्रपति जेलेंस्की से मिलने के लिए राजधानी कीव भी पहुंची थीं, लेकिन कुछ ही समय बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने इस बात पर खुला शक जाहिर किया कि यह लाइसेंसिंग प्रक्रिया वास्तव में आगे बढ़ पाएगी या नहीं। इन तमाम राजनीतिक बयानों के बीच राष्ट्रपति जेलेंस्की का मानना है कि वे इस प्रक्रिया को जल्द से जल्द पूरा देखना चाहते हैं। हालांकि, दूसरी तरफ व्हाइट हाउस के एक जिम्मेदार अधिकारी ने इस पूरे मामले पर बयान देते हुए स्पष्ट किया है कि पैट्रियट इंटरसेप्टर के नए उत्पादन और लाइसेंस को लेकर अभी तक कोई भी अंतिम फैसला नहीं लिया गया है और न ही यूक्रेन को किसी प्रकार की आधिकारिक गारंटी दी गई है।