यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की ने मिडिल ईस्ट में एक बड़ा कदम उठाया है। उन्होंने ऐलान किया है कि यूक्रेन मिडिल ईस्ट के कुछ देशों में तैनात अमेरिकी सैनिकों और वहां के आम लोगों को अपना रक्षा सिस्टम देगा। यह फैसला तब आया है जब अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच तनाव लगातार जारी है। रिपोर्ट के मुताबिक यूक्रेन के ड्रोन एक्सपर्ट और इंटरसेप्टर ड्रोन जॉर्डन पहुंच चुके हैं और उन्होंने अपना काम शुरू कर दिया है।

ड्रोन सिस्टम और खर्चे में क्या है अंतर

यूक्रेन इस मिशन में अपने ‘Sting’ इंटरसेप्टर ड्रोन का इस्तेमाल करेगा। इस एक ड्रोन की कीमत करीब 2,000 डॉलर है। वहीं ईरान के ‘Shahed’ ड्रोन की कीमत लगभग 50,000 डॉलर होती है।

अमेरिका जो पैट्रियट मिसाइल इस्तेमाल करता है उसका एक मिसाइल करीब 4 मिलियन डॉलर का आता है। यूक्रेन के सस्ते और असरदार ड्रोन से काफी कम खर्चे में दुश्मन के ड्रोन गिराए जा सकते हैं।

यूक्रेन के पास इन ड्रोन को गिराने का 85 से 90 प्रतिशत सफलता का रिकॉर्ड है। इसी तजुर्बे का इस्तेमाल अब मिडिल ईस्ट में किया जा रहा है और जॉर्डन के मुवाफ्फक साल्टी एयरबेस पर काम हो रहा है।

यूक्रेन ने मदद के बदले रखी ये बड़ी शर्तें

यूक्रेन ने साफ किया है कि वह यह मदद तभी देगा जब इससे उसके अपने देश की सुरक्षा पर कोई असर न पड़े। इसके साथ ही यूक्रेन ने हथियारों के एक्सचेंज का एक प्रस्ताव भी रखा है।

इस प्रस्ताव के तहत यूक्रेन मिडिल ईस्ट में अपने सस्ते ड्रोन सिस्टम देगा और बदले में उसे पैट्रियट मिसाइल सिस्टम जैसे भारी हथियार चाहिए जो उसके पास कम हैं।

जेलेंस्की ने अरब देशों के नेताओं से यह भी कहा है कि वे रूस पर दबाव बनाएं ताकि यूक्रेन में युद्ध रुक सके। अभी यूक्रेन के पास अमेरिका और अन्य देशों से रक्षा मदद के 11 आवेदन आए हैं जिन पर प्रक्रिया चल रही है।

Aanya

Aanya is Ex IndiaTV Journalist. She covers Expats oriented news, views and interviews With deep understanding of what Hindi Speaking people needs as updates in daily life to avoid fines, comply rules and stay updated.