संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) ने सऊदी अरब द्वारा पेश किए गए एक प्रस्ताव को सर्वसम्मति से मंज़ूर कर लिया है। इस कदम का मकसद महिलाओं को साइबर सुरक्षा में सशक्त बनाना और इंटरनेट की दुनिया में उनकी सुरक्षा बढ़ाना है। अब दुनिया भर के देशों से महिलाओं के लिए डिजिटल तकनीक और शिक्षा को आसान बनाने की मांग की गई है।

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इस प्रस्ताव में कहा गया है कि सदस्य देश डिजिटल दुनिया में मौजूद अंतर को कम करें। खास तौर पर ग्रामीण इलाकों की महिलाओं और दिव्यांग महिलाओं को STEM शिक्षा और डिजिटल टेक्नोलॉजी तक पहुंच मिलनी चाहिए। साथ ही, इंटरनेट पर महिलाओं और लड़कियों की प्राइवेसी और अभिव्यक्ति की आज़ादी के लिए एन्क्रिप्शन और गुमनामी वाले टूल्स के इस्तेमाल पर ज़ोर दिया गया है।

प्रस्ताव में देशों से अपील की गई है कि वे डिजिटल हिंसा की खुल कर निंदा करें और शिक्षा व मीडिया कैंपेन के ज़रिए भेदभाव को खत्म करें। यह पूरी कोशिश सऊदी अरब के Vision 2030 और नेशनल ट्रांसफॉर्मेशन प्रोग्राम का हिस्सा है। सऊदी ने अब तक 150 से ज़्यादा सुधार किए हैं, जिनमें से 50 से ज़्यादा सिर्फ महिलाओं के हक और कानूनी सशक्तिकरण के लिए हैं।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, सऊदी अरब ने पब्लिक प्रॉसिक्यूशन की न्यायपालिका में करीब 25,000 महिलाओं को नियुक्त किया है। वहीं साल 2024 तक महिला वकीलों की संख्या बढ़कर 2,136 हो गई है।

तकनीक के क्षेत्र में भी बड़े बदलाव आए हैं। आईटी और कम्युनिकेशन सेक्टर में महिलाओं की हिस्सेदारी साल 2017 में सिर्फ 7% थी, जो 2024 में बढ़कर 25% हो गई है। इसके अलावा, करीब 40,000 महिलाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डिजिटल सुरक्षा की स्पेशल ट्रेनिंग दी गई है ताकि वे नई डिजिटल टेक्नोलॉजी के विकास में पूरी तरह शामिल हो सकें।

Sushma Kumari

Shushma covers Stories Around Expats and Helpful Contents Related to Daily life of Public. She completed Mass Communication Degree From Makhan lal Chaturvedi College Bhopal and Has 3 years of Field Experience. Earlier She Worked with Jagran Media Patna Office and Now Working with GulfHindi.com