खाड़ी देशों के समुद्री रास्तों में फंसे हजारों नाविकों के लिए एक बड़ी राहत की खबर आई है। संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी IMO ने इन फंसे हुए लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने का फैसला किया है। इस ऑपरेशन के जरिए करीब 11,000 नाविकों को उनके घर भेजा जाएगा।
International Maritime Organization (IMO) ने मंगलवार, 23 जून 2026 को यह एलान किया कि वे खाड़ी क्षेत्र और Strait of Hormuz में फंसे करीब 11,000 नाविकों को निकालने का काम शुरू कर रहे हैं। यह कदम अमेरिका और ईरान के बीच हुए युद्धविराम समझौते के बाद उठाया गया है, जिससे अब समुद्री रास्तों को फिर से खोला जा सका है।
यह पूरा संकट 28 फरवरी 2026 को शुरू हुआ था, जब अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच टकराव बढ़ा और ईरान ने Strait of Hormuz के रास्ते बंद कर दिए थे। इस वजह से करीब 20,000 नाविक वहां फंस गए थे। इस तनाव के दौरान जहाजों पर हुए हमलों में कम से कम 11 से 14 नाविकों की जान भी चली गई थी। लंबे समय तक युद्ध क्षेत्र में फंसे रहने के कारण नाविकों को गहरे तनाव, डिप्रेशन और घबराहट जैसी मानसिक समस्याओं का सामना करना पड़ा। कई जहाजों पर खाना, पानी और ईंधन भी खत्म होने की कगार पर था।
कैसे होगा रेस्क्यू ऑपरेशन
IMO ने इस काम के लिए एक चरणबद्ध योजना बनाई है। ओमान के रक्षा मंत्रालय ने चेतावनी दी है कि पुराना रास्ता अभी सुरक्षित नहीं है क्योंकि वहां तैरती हुई बारूदी सुरंगें हो सकती हैं। इसलिए, रेस्क्यू के लिए दो अस्थायी रास्तों का इस्तेमाल किया जाएगा, जिनमें से एक उत्तरी और दूसरा दक्षिणी मार्ग होगा। IMO की टीम हर जहाज से अलग-अलग संपर्क करेगी और उन्हें बताया जाएगा कि वे किस दिन वहां से निकल सकते हैं।
IMO के महासचिव Arsenio Dominguez ने बताया कि यह बड़ा ऑपरेशन ईरान, ओमान, अमेरिका और अन्य तटीय देशों के सहयोग से चलाया जाएगा। उन्होंने अमेरिका और ईरान के बीच हुए शांति समझौते का स्वागत किया और कहा कि इससे समुद्री सुरक्षा लौटेगी और नागरिक जहाजों पर हमले रुकेंगे।
IMO के समुद्री सुरक्षा विभाग के डायरेक्टर Damien Chevallier ने इस स्थिति को दूसरे विश्व युद्ध के बाद का सबसे बड़ा संकट बताया है। उन्होंने कहा कि इतने सारे नाविकों का एक साथ फंसना बहुत दुखद है और इससे उनके मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ा है। अगर सुरक्षा का भरोसा नहीं मिला, तो आने वाली पीढ़ियां इस पेशे से दूर हो सकती हैं।
