ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य टकराव ने पूरे खाड़ी क्षेत्र में गंभीर स्थिति पैदा कर दी है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने 17 जुलाई 2026 को ईरान और खाड़ी देशों के नागरिक बुनियादी ढांचे पर हो रहे लगातार हमलों की कड़ी निंदा की है। संयुक्त राष्ट्र के उप प्रवक्ता फरहान हक के जरिए जारी बयान में इसे अस्वीकार्य बताया गया है और किसी भी सैन्य समाधान की संभावना को खारिज करते हुए कूटनीतिक बातचीत पर जोर दिया गया है।
हमलों का सिलसिला और मानवीय नुकसान
अमेरिकी सेना की ओर से लगातार छठे दिन किए गए हवाई हमलों में ईरान के पांच पुल, ईरानशहर एयरपोर्ट, शाहिद कलंतरी पोर्ट का समुद्री नियंत्रण टावर और बिजली की सुविधाएं निशाने पर रहीं। इन हमलों के जवाब में ईरान ने भी खाड़ी देशों पर मिसाइल और ड्रोन से हमले किए हैं। कुवैत के एक जल विलवणीकरण संयंत्र और पावर स्टेशन पर हमले से नुकसान और कई लोगों के घायल होने की सूचना है। ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, अमेरिकी हमलों में अब तक 38 लोगों की मौत हुई है और 400 से अधिक लोग घायल हैं।
क्षेत्रीय तनाव और शिपिंग पर असर
फरवरी 2026 में शुरू हुए अमेरिका और इसराइल के संयुक्त सैन्य अभियान के बाद से क्षेत्र में स्थिति बिगड़ती जा रही है। ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों की आवाजाही सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है। अमेरिका ने भी ईरानी बंदरगाहों और जहाजों पर नाकेबंदी फिर से लागू कर दी है। ईरान के संयुक्त राष्ट्र दूत ने इन हमलों को युद्ध अपराध बताया है, जबकि संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर तुर्क ने चेतावनी दी है कि आम नागरिकों और उनके बुनियादी ढांचे को निशाना बनाना अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का उल्लंघन है। दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिका ईरान में बड़ी जीत हासिल कर रहा है।
