न्यूयॉर्क में परमाणु हथियारों को रोकने के लिए एक बहुत बड़ी मीटिंग शुरू हुई है। संयुक्त राष्ट्र (UN) के चीफ एंटोनियो गुटेरेस ने चेतावनी दी है कि दुनिया में परमाणु खतरों का जोखिम बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि पुराने नियमों और समझौतों पर अब भरोसा कम हो रहा है, जिससे पूरी दुनिया की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है।
परमाणु हथियारों को रोकने वाला NPT समझौता क्या है और क्यों है यह जरूरी?
NPT एक अंतरराष्ट्रीय संधि है जो 1970 से लागू है। इसका मुख्य मकसद परमाणु हथियारों को फैलने से रोकना, उन्हें पूरी तरह खत्म करना और परमाणु ऊर्जा का शांतिपूर्ण इस्तेमाल बढ़ाना है। UN चीफ ने बताया कि यह समझौता परमाणु हथियारों को खत्म करने का इकलौता कानूनी रास्ता है। उन्होंने आगाह किया कि अब देश अपने वादों से पीछे हट रहे हैं और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसी नई तकनीकें इस खतरे को और बढ़ा सकती हैं।
दुनिया के बड़े देशों के बीच बढ़ता तनाव और हथियारों की होड़
इस कॉन्फ्रेंस में बताया गया कि दुनिया में परमाणु हथियारों की संख्या दशकों बाद फिर से बढ़ रही है। कुछ मुख्य बातें नीचे दी गई हैं:
- रूस और अमेरिका: फरवरी 2026 में दोनों देशों के बीच ‘न्यू स्टार्ट’ (New START) समझौता खत्म हो गया, जिससे अब हथियारों पर कानूनी रोक नहीं रही।
- चीन: चीन के परमाणु भंडार तेजी से बढ़ रहे हैं, जिससे अन्य देश चिंतित हैं।
- ईरान और अमेरिका: मीटिंग के दौरान ईरान के परमाणु कार्यक्रम और कॉन्फ्रेंस की लीडरशिप को लेकर दोनों देशों के बीच तीखी बहस हुई।
- सैन्य खर्च: साल 2025 में पूरी दुनिया का सैन्य खर्च 2.7 ट्रिलियन डॉलर तक पहुँच गया था।
IAEA और अन्य अधिकारियों की राय
IAEA के चीफ राफेल ग्रॉसी ने कहा कि दुनिया में बढ़ते तनाव के बीच यह समझौता स्थिरता का एक बड़ा जरिया है। उन्होंने यह भी बताया कि कई देश अब बिजली बनाने के लिए परमाणु ऊर्जा की तरफ बढ़ रहे हैं। वहीं, वियतनाम के राजदूत डो हुंग वियत ने चेतावनी दी कि परमाणु हथियारों की एक नई रेस शुरू होने वाली है, जिससे वैश्विक शांति को खतरा हो सकता है। यह कॉन्फ्रेंस 22 मई 2026 तक चलेगी।
Frequently Asked Questions (FAQs)
NPT कॉन्फ्रेंस कब से कब तक चलेगी?
यह कॉन्फ्रेंस न्यूयॉर्क में 27 अप्रैल 2026 को शुरू हुई और 22 मई 2026 तक चलेगी।
किन देशों के पास वर्तमान में परमाणु हथियार हैं?
दुनिया में नौ देशों के पास परमाणु हथियार हैं, जिनमें रूस, अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन, चीन, भारत, पाकिस्तान, इजराइल और उत्तर कोरिया शामिल हैं।