संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने इसराइल और लेबनान के बीच बढ़ते तनाव पर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि लेबनान पर इसराइल के हालिया हमले अमेरिका और ईरान के बीच हुए युद्धविराम समझौते के लिए बड़ा खतरा हैं। इस स्थिति से पूरे क्षेत्र में शांति की कोशिशों को झटका लग सकता है क्योंकि दोनों पक्ष युद्धविराम की शर्तों को लेकर अलग-अलग दावे कर रहे हैं और हिंसक घटनाएं रुकने का नाम नहीं ले रही हैं।

📰: ट्रम्प ने ईरान को दी कड़ी चेतावनी, समझौते का पालन नहीं किया तो होगी बड़ी कार्रवाई, लेबनान युद्ध पर छिड़ी नई बहस.

युद्धविराम को लेकर आखिर विवाद क्या है?

अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्ते का युद्धविराम मंगलवार 8 अप्रैल 2026 को लागू हुआ था, लेकिन इसके दायरे को लेकर मतभेद शुरू हो गए हैं। ईरान और पाकिस्तान का दावा है कि इस समझौते में लेबनान और हिजबुल्लाह के साथ जारी संघर्ष भी शामिल है। वहीं, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इसराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने साफ कहा है कि लेबनान इस समझौते का हिस्सा नहीं है। इसी विवाद के बीच इसराइल ने लेबनान में मात्र 10 मिनट के भीतर 100 से ज्यादा ठिकानों पर हमले किए हैं।

क्षेत्रीय तनाव और हमलों से जुड़ी बड़ी जानकारी

  • लेबनान में नुकसान: लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार इसराइली हमलों में कम से कम 182 लोग मारे गए और 890 से ज्यादा घायल हुए हैं।
  • हिजबुल्लाह का जवाब: गुरुवार को हिजबुल्लाह ने उत्तरी इसराइल के मनारा इलाके पर रॉकेट दागे और कहा कि यह इसराइली हमलों का बदला है।
  • होर्मुज जलडमरूमध्य: ईरान ने लेबनान पर हमले के विरोध में होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को बंद कर दिया है, जिससे समुद्री व्यापार पर असर पड़ सकता है।
  • संयुक्त राष्ट्र की अपील: UN प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने कहा कि महासचिव ने सभी पक्षों से तुरंत शत्रुता समाप्त करने का आग्रह किया है।
  • फ्रांस का रुख: राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने जोर दिया है कि युद्धविराम का सम्मान होना चाहिए ताकि क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए बातचीत शुरू हो सके।

क्या इस स्थिति का असर खाड़ी देशों पर पड़ेगा?

इसराइल और लेबनान के बीच बढ़ते युद्ध का असर खाड़ी देशों (Gulf Countries) में रह रहे प्रवासियों और व्यापार पर पड़ सकता है। ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करना एक गंभीर कदम है क्योंकि यहाँ से दुनिया का बड़ा तेल व्यापार होता है। कुवैत, सऊदी अरब और UAE जैसे देशों के पास तैनात अमेरिकी सेना भी अभी अलर्ट पर है। संयुक्त राष्ट्र का मानना है कि अगर यह हिंसा नहीं रुकी, तो मुश्किल से मिली शांति की कोशिशें पूरी तरह बर्बाद हो सकती हैं।