दुनिया की अर्थव्यवस्था के लिए एक बुरी खबर आई है. संयुक्त राष्ट्र (UN) ने ग्लोबल ग्रोथ यानी दुनिया की आर्थिक तरक्की के अपने अनुमान को घटा दिया है. इसका मुख्य कारण ईरान के खिलाफ जारी युद्ध और मिडिल ईस्ट में बढ़ा तनाव है. इस स्थिति की वजह से अब पूरी दुनिया में महंगाई बढ़ सकती है और सामान महंगा हो सकता है.

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ग्लोबल ग्रोथ और महंगाई के नए आंकड़े

UN के आर्थिक और सामाजिक मामलों के विभाग (DESA) ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि युद्ध की वजह से आर्थिक हालात बिगड़े हैं. नीचे दी गई टेबल में पूरी जानकारी दी गई है:

विवरण पुराना अनुमान/साल नया अनुमान/साल
ग्लोबल GDP ग्रोथ 2.7% (जनवरी) 2.5% (2026)
भविष्य की ग्रोथ 2.8% (2027)
सबसे खराब स्थिति (Scenario) 2.1% (2026)
कुल ग्लोबल महंगाई 3.9% (2026)
विकसित देशों में महंगाई 2.6% (2025) 2.9% (2026)
विकासशील देशों में महंगाई 4.2% (2025) 5.2% (2026)
वेस्टर्न एशिया ग्रोथ 3.6% (2025) 1.4% (2026)

ईरान युद्ध और बाजार पर इसका असर

यह पूरा संकट 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इसराइल द्वारा ईरान पर किए गए हवाई हमलों से शुरू हुआ था. इसके जवाब में ईरान ने 4 मार्च 2026 को स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज (Strait of Hormuz) को बंद कर दिया. यह रास्ता तेल, नेचुरल गैस और खाद के शिपमेंट के लिए बहुत जरूरी है.

UN DESA के आर्थिक विश्लेषण डायरेक्टर शांतनु मुखर्जी ने बताया कि शुरुआत में यह सिर्फ ऊर्जा बाजार को झटका था, लेकिन अब यह एक बड़ा सप्लाई शॉक बन गया है. इससे दुनिया भर में तेल और रिफाइनरी उत्पादों के दाम बढ़ गए हैं. इसका असर आम लोगों की जेब पर पड़ेगा क्योंकि महंगाई बढ़ने से कई देशों की सरकारें अब ब्याज दरों में कटौती करने का फैसला टाल रही हैं. वेस्टर्न एशिया के देशों में बुनियादी ढांचे के नुकसान और पर्यटन कम होने से सबसे ज्यादा आर्थिक चोट पहुँची है.

Frequently Asked Questions (FAQs)

UN ने आर्थिक ग्रोथ का अनुमान क्यों घटाया?

UN ने ईरान के खिलाफ युद्ध और मिडिल ईस्ट में बढ़े संकट की वजह से यह फैसला लिया है. इससे तेल की सप्लाई रुकी है और दुनिया भर में महंगाई बढ़ी है.

इस युद्ध का सबसे ज्यादा असर किस इलाके पर पड़ा है?

इसका सबसे बुरा असर वेस्टर्न एशिया पर पड़ा है. यहाँ की आर्थिक ग्रोथ 2025 के 3.6% से गिरकर 2026 में केवल 1.4% रह सकती है.