संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) ने ईरान को सख्त निर्देश दिया है कि वह अपने पड़ोसी देशों पर हो रहे हमलों और धमकियों को तुरंत बंद करे। 25 मार्च 2026 को हुई एक विशेष चर्चा के दौरान खाड़ी देशों और जॉर्डन ने ईरान की सैन्य कार्रवाइयों को क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा बताया। परिषद ने स्पष्ट किया है कि ये हमले अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन हैं और इन्हें बिना किसी शर्त के रोका जाना चाहिए। संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि नागरिक ठिकानों पर हमले युद्ध अपराध के दायरे में आ सकते हैं।

हमलों और संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव से जुड़ी मुख्य बातें

ईरान द्वारा पिछले कुछ समय से खाड़ी देशों और जॉर्डन के ऊर्जा और नागरिक बुनियादी ढांचों को निशाना बनाया जा रहा है। इस स्थिति को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं और प्रस्ताव पारित किए गए हैं।

  • 11 मार्च 2026: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने संकल्प 2817 पारित कर ईरानी हमलों की निंदा की।
  • 28 फरवरी 2026: इस तारीख के आसपास ईरान ने खाड़ी देशों पर ड्रोन और मिसाइल हमले शुरू किए थे।
  • 18 मार्च 2026: बहरीन ने GCC देशों और जॉर्डन की ओर से इस मुद्दे पर तत्काल चर्चा की मांग की।
  • 25 मार्च 2026: मानवाधिकार परिषद ने हमलों को रोकने और शांति बहाल करने पर जोर दिया।
  • जॉर्डन ने बताया कि उसने अब तक 240 से ज्यादा ईरानी ड्रोन और मिसाइलों को बीच में ही मार गिराया है।

अंतरराष्ट्रीय अधिकारियों और खाड़ी देशों के बड़े बयान

इस संकट के बीच विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों ने अपनी बात रखी है। खाड़ी देशों ने इसे अपनी संप्रभुता पर सीधा हमला माना है, जबकि ईरान ने इन कार्रवाइयों को जवाबी कार्रवाई बताया है।

अधिकारी/देश महत्वपूर्ण टिप्पणी
Volker Turk (UN) आम नागरिकों पर हमले बेहद खतरनाक और अप्रत्याशित हैं।
कुवैत के राजदूत खाड़ी देश क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए अस्तित्व के खतरे का सामना कर रहे हैं।
जॉर्डन के प्रतिनिधि ईरानी हमलों के कारण जॉर्डन में 24 नागरिक हताहत हुए हैं।
सऊदी अरब (अरब ग्रुप) ईरान के हमले अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का गंभीर उल्लंघन हैं।

आम लोगों और प्रवासियों पर क्या असर होगा?

खाड़ी देशों में चल रहा यह तनाव वहां रहने वाले लाखों विदेशी कामगारों, जिनमें बड़ी संख्या में भारतीय शामिल हैं, के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। सुरक्षा परिषद ने मांग की है कि ईरान अपनी प्रॉक्सी ताकतों के माध्यम से किए जा रहे हमलों को भी रोके। जॉर्डन और खाड़ी देशों ने साफ कर दिया है कि वे अपनी रक्षा के लिए संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 51 के तहत कदम उठाने का अधिकार रखते हैं। यूरोपीय संघ ने भी इस प्रस्ताव का समर्थन किया है और ईरान से अंतरराष्ट्रीय शांति बनाए रखने की अपील की है। भविष्य में इस स्थिति की निगरानी के लिए संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख को जिम्मेदारी दी जा सकती है।