UN Human Rights Office का बड़ा बयान, लेबनान में इसराइल ने किए गंभीर उल्लंघन, लाखों लोग बेघर

कुवैत न्यूज़ एजेंसी (KUNA) ने एक बड़ी खबर साझा की है. संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय (UN Human Rights Office) ने लेबनान में इसराइल द्वारा किए गए गंभीर मानवाधिकार उल्लंघनों की बात कही है. इस मामले में दुनिया भर के मानवाधिकार विशेषज्ञों ने गहरी चिंता जताई है और इसे अंतरराष्ट्रीय नियमों का खुला उल्लंघन बताया है.

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लेबनान में क्या हुआ और कितना नुकसान हुआ

लेबनान में हालात काफी खराब रहे हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक 2 मार्च 2026 से अब तक इसराइल के हमलों में 1,500 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है. इसके अलावा 10 लाख से ज्यादा लोग अपने घरों को छोड़कर पलायन कर चुके हैं. 8 अप्रैल 2026 को हुए बड़े हमलों को UN चीफ वोल्कर तुर्क ने बेहद भयानक बताया था. उन्होंने कहा कि यह हमला उस वक्त हुआ जब ईरान के साथ युद्धविराम पर सहमति बनी थी.

UN विशेषज्ञों ने क्या मांग की है

UN के स्वतंत्र विशेषज्ञों ने इसराइल की बमबारी को अवैध बताया है. उन्होंने अमेरिका से अपील की है कि वह अपनी ताकत का इस्तेमाल कर इन हमलों को तुरंत रुकवाए. विशेषज्ञों ने सभी देशों से यह भी कहा है कि जब तक मानवाधिकारों के उल्लंघन के सबूत मिल रहे हैं, तब तक इसराइल को हथियार देना बंद कर देना चाहिए. UN प्रवक्ता थामिन अल-खीतन ने साफ किया कि आम नागरिकों या नागरिक संपत्तियों को जानबूझकर निशाना बनाना युद्ध अपराध की श्रेणी में आता है.

अंतरराष्ट्रीय नियमों और सुरक्षा पर सवाल

UN मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर तुर्क ने जोर दिया कि युद्ध के दौरान आम नागरिकों की सुरक्षा करना कोई विकल्प नहीं बल्कि एक जरूरी नियम है. उन्होंने इन सभी घटनाओं की स्वतंत्र जांच कराने और दोषियों को सजा देने की मांग की है. वहीं, विशेषज्ञों ने अमेरिका द्वारा लगाई गई नौसैनिक नाकाबंदी को युद्ध का कदम बताया है, जिससे इलाके में तनाव और ज्यादा बढ़ गया है.