Middle East Conflict: UN का बड़ा बयान, कहा युद्ध से हल नहीं होगा मामला, 3 करोड़ लोग हो सकते हैं गरीब
संयुक्त राष्ट्र (UN) ने मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव को लेकर एक बड़ी चेतावनी जारी की है। UN के प्रवक्ता Stephane Dujarric ने कहा कि हफ्तों की तबाही और दुख के बाद अब यह साफ हो गया है कि इस जंग का कोई सैन्य समाधान नहीं है। इस तनाव का असर अब आम लोगों की जेब और जिंदगी पर भी दिखने लगा है।
US और ईरान के बीच क्या हुई बातचीत?
पाकिस्तान के इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में बातचीत हुई। हालांकि इस मीटिंग में कोई अंतिम समझौता नहीं हो पाया, लेकिन UN ने इसे बातचीत शुरू करने की दिशा में एक अच्छा कदम माना है। Secretary-General António Guterres ने दोनों देशों से अपील की है कि वे आपसी बातचीत के जरिए ही मसलों को सुलझाएं क्योंकि युद्ध सिर्फ तबाही लाता है।
आम आदमी और अर्थव्यवस्था पर क्या होगा असर?
UN Development Programme (UNDP) ने एक नई रिपोर्ट जारी की है जिसने सबको चिंता में डाल दिया है। इस रिपोर्ट के मुख्य बिंदु नीचे दिए गए हैं:
- मिडिल ईस्ट में सैन्य तनाव बढ़ने से दुनिया भर में 3 करोड़ से ज्यादा लोग गरीबी की चपेट में आ सकते हैं।
- इसका सबसे बुरा असर गल्फ देशों, एशिया और अफ्रीका के गरीब देशों पर पड़ेगा।
- UNDP Administrator Alexander De Croo ने कहा कि युद्ध विकास को पीछे ले जाता है और सालों की मेहनत को कुछ ही हफ्तों में खत्म कर देता है।
सीजफायर और अंतरराष्ट्रीय नियमों का क्या है अपडेट?
UN ने जोर देकर कहा है कि मौजूदा सीजफायर को पूरी तरह से बनाए रखना जरूरी है और किसी भी तरह का उल्लंघन नहीं होना चाहिए। साथ ही, Strait of Hormuz जैसे समुद्री रास्तों पर जहाजों की आवाजाही को अंतरराष्ट्रीय कानून के हिसाब से सुरक्षित रखने की बात कही गई है। UN ने सऊदी अरब, मिस्र और तुर्की जैसे देशों से भी इस मामले में कूटनीतिक मदद मांगी है।