संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UN Security Council) ने 10 जुलाई 2026 को एक इमरजेंसी मीटिंग बुलाई. इस बैठक में ईरान के परमाणु प्रोग्राम और मिडिल ईस्ट में किए गए हमलों की कड़ी निंदा की गई. सुरक्षा परिषद ने कमर्शियल जहाजों पर होने वाले हमलों पर भी गंभीर चिंता जताई है.
मीटिंग के दौरान 2015 के परमाणु समझौते (JCPOA) और रेजोल्यूशन 2231 पर चर्चा हुई. यूके की डिप्टी परमानेंट रिप्रेजेंटेटिव राजदूत केट फोस्टर ने ईरान के हमलों की कड़ी निंदा की. उन्होंने मामला शांत करने और बातचीत के जरिए विवाद सुलझाने की अपील की. उन्होंने कहा कि बातचीत फिर से शुरू होने की खबरें अच्छी हैं, लेकिन ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं को लेकर चिंता अब भी बनी हुई है.
पर्शियन गल्फ में इन दिनों सैन्य तनाव बहुत बढ़ गया है. इस वजह से स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज़ (Strait of Hormuz) से गुजरने वाले जहाजों की संख्या में बड़ी गिरावट आई है. रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका और ईरान के बीच फिर से लड़ाई शुरू हो गई है. जून में दोनों देशों के बीच एक समझौता (MOU) हुआ था, जिसमें ईरान ने परमाणु हथियार न बनाने और इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी (IAEA) के साथ पूरा सहयोग करने का वादा किया था.
बता दें कि 28 सितंबर 2025 को यूके, फ्रांस और जर्मनी की वजह से ‘स्नैपबैक प्रोसेस’ पूरा हुआ था. ईरान ने समझौते की शर्तों को पूरा नहीं किया, इसलिए उस पर हथियारों की पाबंदी (arms embargo) फिर से लागू कर दी गई है.
इससे पहले 2 जुलाई 2026 को बहरीन की मांग पर एक इमरजेंसी मीटिंग हुई थी. जून के आखिरी दिनों में ईरान ने बहरीन और कुवैत पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए थे. बहरीन सरकार के मुताबिक 28 फरवरी से अब तक उस पर 808 हमले हुए हैं. मार्च 2026 में सुरक्षा परिषद ने रेजोल्यूशन 2817 पास कर इन हमलों को गलत बताया था.
वहीं दूसरी ओर ईरान ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है. ईरान का कहना है कि इस तनाव के लिए वाशिंगटन और इजराइल जिम्मेदार हैं. ईरान ने दावा किया कि उसके हमले सिर्फ अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हुए थे और उसने सुरक्षा परिषद से अपील की कि वह जारी राजनयिक कोशिशों में बाधा न डाले.
