खाड़ी क्षेत्र और अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार के लिए सबसे अहम माने जाने वाले स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की वोटिंग अब टल गई है. शुक्रवार 3 अप्रैल 2026 को होने वाली यह वोटिंग अब शनिवार 4 अप्रैल 2026 को आयोजित की जाएगी. संयुक्त राष्ट्र में गुड फ्राइडे की छुट्टी होने के कारण इस कार्यक्रम में यह बदलाव किया गया है. बहरीन की अध्यक्षता में पेश किए गए इस प्रस्ताव पर पूरी दुनिया की नज़रें टिकी हुई हैं क्योंकि यह समुद्री रास्तों की सुरक्षा और वैश्विक व्यापार से जुड़ा मामला है.

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वोटिंग में देरी और नए बदलावों की क्या है मुख्य वजह?

संयुक्त राष्ट्र में गुड फ्राइडे को सार्वजनिक अवकाश के रूप में मनाया जाता है, इसी वजह से वोटिंग को एक दिन के लिए आगे बढ़ाने का फैसला लिया गया. बहरीन ने अप्रैल महीने के लिए सुरक्षा परिषद की अध्यक्षता संभाली है और उसने ही यह ड्राफ्ट पेश किया है. पिछले 24 घंटों में इस प्रस्ताव में कुछ महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं ताकि अन्य सदस्य देशों का समर्थन हासिल किया जा सके. अब नए ड्राफ्ट में सैन्य कार्रवाई के बजाय केवल रक्षात्मक साधनों (defensive means) के इस्तेमाल की बात कही गई है, जिससे विवाद की संभावना कम हो सके.

  • वोटिंग की नई तारीख: शनिवार, 4 अप्रैल 2026 निर्धारित की गई है.
  • प्रस्ताव का उद्देश्य: होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही को सुरक्षित बनाना.
  • बदलाव का कारण: रूस, चीन और फ्रांस के विरोध के बाद ड्राफ्ट को नरम किया गया है.
  • प्रस्तावित अवधि: सुरक्षा के ये उपाय कम से कम छह महीने के लिए लागू करने की योजना है.
  • ईरान का पक्ष: ईरान ने साफ किया है कि वह रास्ते बंद नहीं करेगा और तनाव के लिए अमेरिका को जिम्मेदार बताया है.

खाड़ी देशों और प्रवासियों पर इसका कैसा होगा असर?

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया का वह रास्ता है जहाँ से खाड़ी देशों का अधिकतर तेल और गैस का व्यापार होता है. अगर यहाँ किसी भी तरह की रुकावट आती है, तो इसका सीधा असर भारत जैसे देशों की अर्थव्यवस्था और खाड़ी में रहने वाले लाखों भारतीय प्रवासियों पर पड़ सकता है. बहरीन के राजदूत जमाल अलरोवेई ने कहा है कि यह स्थिति आर्थिक आतंकवाद जैसी है जिससे पूरी दुनिया प्रभावित हो रही है. प्रवासियों के लिए समुद्री सुरक्षा का मतलब है स्थिर बाज़ार और सुरक्षित नौकरी की स्थिति, इसलिए इस वोटिंग का परिणाम बहुत महत्वपूर्ण होगा.

सुरक्षा परिषद के मतदान से जुड़े खास नियम और प्रक्रिया

नियम/प्रक्रिया विवरण
ज़रूरी वोट किसी भी फैसले के लिए कम से कम 9 सदस्यों के सकारात्मक वोट चाहिए होते हैं.
वीटो पावर स्थायी सदस्य (चीन, फ्रांस, रूस, यूके, यूएस) किसी भी बड़े फैसले को रोक सकते हैं.
प्रक्रियात्मक वोट प्रक्रिया से जुड़े मामलों में वीटो पावर का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता.
प्रस्ताव का आधार यह प्रस्ताव बहरीन के विदेश मंत्री अब्दुललतीफ़ बिन राशिद अल ज़यानी द्वारा दिया गया है.
Aanya

Aanya is Ex IndiaTV Journalist. She covers Expats oriented news, views and interviews With deep understanding of what Hindi Speaking people needs as updates in daily life to avoid fines, comply rules and stay updated.