होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा को लेकर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UN Security Council) में मंगलवार, 8 अप्रैल 2026 को एक महत्वपूर्ण मतदान होने जा रहा है. चीन और रूस के कड़े विरोध के बाद इस प्रस्ताव को काफी नरम कर दिया गया है और अब इसमें सैन्य बल के इस्तेमाल की बात हटा दी गई है. इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को सख्त अल्टीमेटम देते हुए जलमार्ग खोलने के लिए मंगलवार आधी रात तक का समय दिया है.

🗞️: ईरान ने लोगों से की पावर प्लांट पर इंसानी दीवार बनाने की अपील, ट्रंप की धमकी के बाद खाड़ी में तनाव बढ़ा.

वोटिंग में क्या बदलाव हुए और चीन का क्या रुख है?

बहरीन द्वारा प्रस्तावित इस ड्राफ्ट में पहले ताकत के इस्तेमाल की अनुमति मांगी गई थी, लेकिन वीटो पावर रखने वाले चीन ने इसका कड़ा विरोध किया. चीन का कहना है कि सैन्य कार्रवाई से स्थिति और ज्यादा खराब हो सकती है. अब संशोधित प्रस्ताव में केवल रक्षात्मक उपायों और सदस्य देशों के बीच समन्वय की बात कही गई है. इसमें व्यापारिक जहाजों को सुरक्षा देने और आपसी सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया है ताकि नेविगेशन सुरक्षित रहे.

  • प्रस्ताव पास होने के लिए कम से कम 9 वोटों की जरूरत होगी.
  • चीन, रूस, फ्रांस, ब्रिटेन और अमेरिका में से किसी का वीटो नहीं होना चाहिए.
  • नया प्रस्ताव अब केवल रक्षात्मक गतिविधियों तक ही सीमित रखा गया है.
  • चीन ने परिषद से राजनीतिक समाधान और तनाव कम करने की अपील की है.

ट्रंप का अल्टीमेटम और ईरान की कड़ी प्रतिक्रिया

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी है कि अगर 8 अप्रैल की आधी रात तक रास्ता नहीं खोला गया, तो ईरान के नेशनल पावर प्लांट और पुलों को नष्ट कर दिया जाएगा. इस तनाव का सीधा असर खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों और व्यापार पर पड़ सकता है. दूसरी ओर, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराक्छी ने सुरक्षा परिषद को किसी भी उकसावे वाली कार्रवाई के खिलाफ चेतावनी दी है और कहा है कि इससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ेगा.

पक्ष मुख्य स्टैंड और फैसला
चीन और रूस बल प्रयोग का विरोध किया और शांतिपूर्ण समाधान पर जोर दिया
डोनाल्ड ट्रंप 8 अप्रैल तक रास्ता खोलने का समय दिया, हमले की धमकी दी
ईरान किसी भी विदेशी हस्तक्षेप को उकसावा करार दिया
बहरीन प्रस्ताव पेश किया और खाड़ी देशों का समर्थन जुटाया

खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीय और अन्य प्रवासियों के लिए यह स्थिति काफी गंभीर है क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य तेल की सप्लाई का मुख्य रास्ता है. अगर यहां तनाव बढ़ता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें और माल की आवाजाही पर सीधा असर पड़ेगा. संयुक्त राष्ट्र के इस फैसले पर अब पूरी दुनिया की नजर टिकी हुई है.