Yemen News: अमेरिका और ईरान के बीच हुए नए युद्धविराम समझौते ने यमन में सालों से चल रही जंग को खत्म करने की एक नई उम्मीद जगाई है। संयुक्त राष्ट्र (UN) के विशेष दूत Hans Grundberg ने यमन के आपस में लड़ रहे गुटों से अपील की है कि वे इस मौके का फायदा उठाएं और शांति की दिशा में कदम बढ़ाएं।
UN दूत Hans Grundberg ने कहा कि यह समय क्षेत्रीय तनाव को कम करने और रुकी हुई राजनीतिक बातचीत को फिर से शुरू करने का एक बड़ा मौका है। उनका मानना है कि अगर warring parties इस अवसर का लाभ उठाती हैं, तो यमन के लंबे संघर्ष का स्थायी समाधान निकाला जा सकता है।
अमेरिका और ईरान के बीच क्या हुआ समझौता
कुवैत समाचार एजेंसी (KUNA) के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच 14 जून 2026 को एक नया युद्धविराम समझौता हुआ। इस डील पर हस्ताक्षर 19 जून 2026 को होने की उम्मीद है। यह समझौता अप्रैल में हुई पिछली डील का ही विस्तार है। इस समझौते में कुछ मुख्य बातें शामिल हैं:
- Strait of Hormuz को फिर से खोला जाएगा ताकि जहाजों की आवाजाही सामान्य हो सके।
- अमेरिकी नौसेना ईरान के बंदरगाहों की नाकेबंदी खत्म करेगी।
- ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत फिर से शुरू होगी।
हालांकि, इस डील को लेकर कुछ विवाद भी हैं। ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स चाहती हैं कि बातचीत से पहले उनके फ्रीज किए गए फंड्स वापस मिलें, जबकि अमेरिका का कहना है कि पहले समझौते की शर्तों का पालन करना होगा।
UN सुरक्षा परिषद और हूती विद्रोहियों की भूमिका
16 जून 2026 को UN सुरक्षा परिषद में यमन पर एक ब्रीफिंग हुई। इसमें Hans Grundberg और मानवीय मामलों के अंडर-सेक्रेटरी-जनरल Tom Fletcher ने जानकारी दी। बैठक में इस बात पर चर्चा हुई कि हूती विद्रोही अभी भी मध्य पूर्व के संकट में शामिल हैं।
फरवरी में अमेरिका और इसराइल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद से स्थिति तनावपूर्ण है। फिलहाल यह साफ नहीं है कि अमेरिका-ईरान डील के बाद हूती विद्रोही इसराइल या समुद्री जहाजों पर हमले बंद करेंगे या नहीं। हालांकि, Strait of Hormuz में जहाजों की आवाजाही फिर से शुरू होती दिख रही है।