हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में एक कार्गो शिप पर हुए हमले के बाद संयुक्त राष्ट्र (UN) ने फंसे हुए नाविकों को निकालने का काम रोक दिया है। इस हमले की वजह से अब हज़ारों नाविक एक बार फिर संकट में फंस गए हैं। यह घटना 25 जून 2026 को हुई, जिसके बाद अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) ने अपनी बचाव योजना को तुरंत निलंबित कर दिया।
कार्गो शिप पर हुआ हमला
ब्रिटिश मिलिट्री के मुताबिक, एक कार्गो शिप को प्रोजेक्टाइल से निशाना बनाया गया, जिससे जहाज के ब्रिज को नुकसान पहुंचा। हालांकि, इस हमले में किसी की जान नहीं गई और न ही समुद्र में कोई प्रदूषण फैला। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि यह हमला ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने किया है।
क्या था UN का रेस्क्यू प्लान
UN के अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) ने 23 जून 2026 को करीब 11,000 फंसे हुए नाविकों को निकालने की योजना बनाई थी। यह फैसला अमेरिका और ईरान के बीच हुए एक अंतरिम शांति समझौते के बाद लिया गया था। इस योजना के तहत दो रास्ते तय किए गए थे:
- उत्तरी रास्ता: यह रास्ता ईरान के समुद्री इलाके से होकर जाता था।
- दक्षिणी रास्ता: यह रास्ता ओमान और अमेरिका के समन्वय वाले इलाकों से होकर जाता था।
ओमान ने इस कोशिश में मदद करते हुए बिना किसी फीस के एक अस्थायी शिपिंग कॉरिडोर बनाने की बात कही थी। वहीं, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने साफ किया कि अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों पर कोई देश टैक्स नहीं लगा सकता।
ईरान की चेतावनी और विवाद
ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने UN के इन रास्तों को अस्वीकार्य और खतरनाक बताया है। ईरान का कहना है कि केवल वही रास्ते मान्य हैं जिन्हें ईरान ने तय किया है और जहाजों को IRGC नेवी के साथ तालमेल करना जरूरी है।
IMO के महासचिव आर्सेनिओ डोमिंगुज़ ने इस हमले की पुष्टि की, लेकिन उन्होंने कहा कि जिस जहाज पर हमला हुआ वह IMO के रेस्क्यू फ्रेमवर्क के तहत नहीं चल रहा था। हालांकि, ब्रिटिश मिलिट्री का दावा है कि जहाज UN द्वारा मंजूर किए गए रास्ते पर ही था। इस तनाव की वजह से सैकड़ों जहाज और हज़ारों नाविक अब भी खाड़ी में फंसे हुए हैं।
