हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) फिर से खुल गया है और तेल की कीमतों में कुछ राहत मिली है, लेकिन गरीब देशों के लिए मुसीबत अभी खत्म नहीं हुई है। संयुक्त राष्ट्र की ट्रेड एजेंसी (UNCTAD) ने चेतावनी दी है कि खाने-पीने के सामान और ईंधन की बढ़ती कीमतें लंबे समय तक आम लोगों की जेब पर भारी पड़ेंगी। दुनिया के कई संवेदनशील देशों के लिए यह आर्थिक संकट गहरा सकता है।
UNCTAD ने मंगलवार, 30 जून 2026 को अपनी एक रिपोर्ट जारी की। इसमें बताया गया कि भले ही तेल बाजार में तुरंत राहत मिल गई हो, लेकिन खाने-पीने की चीजों और ट्रांसपोर्ट के सिस्टम को पटरी पर लौटने में काफी समय लगेगा। दरअसल, इस रणनीतिक समुद्री रास्ते पर 100 दिनों से ज्यादा समय तक भारी रुकावट रही, जिसकी वजह से सप्लाई चेन पूरी तरह बिगड़ गई है। अब इसे फिर से ठीक करने में वक्त लगेगा।
रिपोर्ट के मुताबिक, ईंधन, गैस और खाद की कीमतें बढ़ी हुई रहेंगी, जिसका सीधा असर खेती-बाड़ी और घर के बजट पर पड़ेगा। एजेंसी ने ऐसे 61 गरीब देशों की पहचान की है, जो तेल और अनाज के आयात पर निर्भर हैं और इस संकट से सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। इसमें यमन जैसे देश शामिल हैं जिनकी अर्थव्यवस्था पहले से ही कमजोर है, और केप वर्डे जैसे देश जो ईंधन के लिए पूरी तरह बाहर पर निर्भर हैं।
महंगाई का आम लोगों पर असर
UNCTAD ने एक डराने वाली बात यह भी कही कि अगर खाने-पीने की चीजों की कीमतों में सिर्फ 5% की बढ़ोतरी होती है, तो इससे बच्चों के कुपोषण और कमजोरी (childhood wasting) का खतरा काफी बढ़ जाता है। एजेंसी ने दुनिया के अमीर देशों से अपील की है कि वे इन गरीब देशों की मदद करें ताकि वे इस आर्थिक झटके से उबर सकें।
संकट की मुख्य वजह और आंकड़े
यह पूरा विवाद फरवरी 2026 के अंत में ईरान पर अमेरिका और इसराइल के हवाई हमलों के बाद शुरू हुआ था। इस वजह से दुनिया की करीब 20% तेल और गैस सप्लाई रुक गई थी। हालांकि अब अमेरिका और ईरान के बीच हुए एक समझौते के बाद कच्चे तेल (Brent crude) के दाम पहले जैसे हो गए हैं, लेकिन अन्य चीजों की महंगाई अब भी बनी हुई है।
| प्रभावित क्षेत्र/डेटा | विवरण/असर |
|---|---|
| कुल प्रभावित गरीब देश | 61 देश |
| तेल की कीमतों में 50% बढ़त | आयात बिल में 20 अरब डॉलर से ज्यादा की बढ़ोतरी |
| खाद्य कीमतों में 5% बढ़त | बच्चों में कुपोषण का खतरा बढ़ा |
| शिपिंग ट्रैफिक (मार्च 2026) | 95% से ज्यादा की गिरावट |
| तेल आयात करने वाले देश | 75 में से 65 गरीब देश तेल आयात पर निर्भर |
UNCTAD के इनोवेशन और रिसर्च चीफ कार्लोस राज़ो और ट्रांसपोर्ट सेक्शन की चीफ फ्रिडा यूसुफ ने इन रिपोर्टों के जरिए दुनिया को आगाह किया कि केवल तेल के दाम गिरना काफी नहीं है, बल्कि बुनियादी जरूरतों की सप्लाई चेन को सुधारना ज्यादा जरूरी है।
