संयुक्त राष्ट्र (UN) के सेक्रेटरी-जनरल एंटोनियो गुटेरेस ने मिडिल ईस्ट में बढ़ते हमलों को लेकर एक गंभीर चेतावनी जारी की है। हाल के दिनों में तेल की रिफाइनरी और पानी साफ करने वाले प्लांट पर जो हमले हुए हैं, उससे पर्यावरण और आम लोगों की सेहत पर बहुत बुरा असर पड़ सकता है। इन हमलों की वजह से हवा और पीने के पानी में जहरीले तत्व घुलने का डर पैदा हो गया है, जिससे गल्फ देशों में रहने वाले लाखों प्रवासियों और स्थानीय लोगों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

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पानी की कमी और बीमारियों का खतरा

कुवैत जैसे देश अपने पीने के पानी का 90 प्रतिशत हिस्सा समंदर के पानी को साफ करके हासिल करते हैं। संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि अगर इन बड़े वाटर प्लांट को निशाना बनाया जाता है, तो आम लोगों के लिए पीने के पानी का भारी संकट खड़ा हो जाएगा। इसके अलावा, तेल के ठिकानों पर हमले और वहां लगने वाली आग से हवा में लेड और ब्लैक कार्बन जैसे जहरीले तत्व मिल रहे हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) भी हवा और पानी में फैल रहे इस प्रदूषण पर नजर बनाए हुए है क्योंकि इससे लोगों को सांस की गंभीर बीमारियां हो सकती हैं।

हाल ही में किन जगहों पर हुआ नुकसान

कुवैत के रक्षा मंत्रालय ने बताया कि 9 और 10 मार्च को कुवैत की तरफ आए कई ड्रोन और मिसाइलों को रास्ते में ही रोक दिया गया। हालांकि 9 मार्च को सुबिया पावर एंड वाटर प्लांट के एक फ्यूल टैंक में आग लग गई थी, जिसे समय रहते बुझा लिया गया। रिपोर्ट के मुताबिक कुवैत के दोहा वेस्ट प्लांट, दुबई के जेबेल अली पोर्ट के पास और यूएई के फुजैरा F-1 प्लांट के आसपास भी नुकसान की खबर आई है। यह सब 8 मार्च को ईरान के तेल ठिकानों पर इजराइल के हमले और उसके बाद हुए पलटवार के कारण हुआ है।

नियमों का पालन करने की अपील

संयुक्त राष्ट्र के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने साफ तौर पर कहा है कि युद्ध के दौरान भी अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन करना जरूरी है। इन नियमों के तहत आम लोगों के इस्तेमाल की चीजों, पानी के सिस्टम, स्कूल और अस्पतालों को नुकसान पहुंचाना मना है। यूएन ने सभी पक्षों से अपील की है कि वे ऐसे बुनियादी ढांचे को हमले का शिकार न बनाएं जिन पर लाखों लोगों की जिंदगी टिकी है।