United Nations की एक कमेटी ने Israel के नए कानून पर गंभीर सवाल उठाए हैं. इसराइल ने एक ऐसा कानून बनाया है जिसमें सिर्फ Palestinians को मौत की सजा दी जा सकती है. UN ने इसे मानवाधिकारों का बड़ा उल्लंघन बताया है और इस कानून को तुरंत खत्म करने की मांग की है. इस मामले को लेकर अब पूरी दुनिया में चर्चा शुरू हो गई है.
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Israel के नए मौत की सजा वाले कानून में क्या नियम हैं?
इसराइल की संसद यानी Knesset ने मार्च 2026 में यह कानून पास किया था. इस कानून के तहत कुछ खास बातें तय की गई हैं:
- सजा का तरीका: सैन्य अदालतों में आतंकवाद के मामलों में अब फांसी की सजा को मुख्य सजा माना जाएगा.
- समय सीमा: अंतिम फैसला आने के बाद 90 दिनों के भीतर फांसी देना जरूरी होगा.
- कोई माफी नहीं: इस कानून में सजा कम करने, माफ करने या किसी भी तरह की राहत देने की मनाही है.
- सिर्फ एक समूह के लिए: सबसे बड़ी बात यह है कि यह कानून इसराइल के नागरिकों या वहां रहने वाले निवासियों पर लागू नहीं होगा, जिससे यह सिर्फ Palestinians के लिए प्रभावी हो गया है.
UN और मानवाधिकार संगठनों ने क्या कहा?
UN की Committee on the Elimination of Racial Discrimination (CERD) ने 1 मई 2026 को इस कानून के खिलाफ आधिकारिक चेतावनी जारी की. विशेषज्ञों ने इस पर अपनी राय रखी है:
- CERD का बयान: कमेटी ने कहा कि यह कानून नस्लीय भेदभाव को बढ़ावा देता है और मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन है.
- अदालतों का रिकॉर्ड: B’Tselem नाम की संस्था ने बताया कि सैन्य अदालतों में सजा मिलने की दर 96 प्रतिशत है, जो अक्सर दबाव में लिए गए बयानों पर आधारित होती है.
- विशेषज्ञों की राय: Jian Guan और Dr. Suhad Bishara जैसे कानूनी जानकारों ने पुष्टि की है कि यह कानून केवल फिलिस्तीनियों को निशाना बनाने के लिए बनाया गया है.
Frequently Asked Questions (FAQs)
Israel का नया मौत की सजा वाला कानून कब लागू हुआ?
यह कानून मार्च 2026 में इसराइल की संसद (Knesset) द्वारा पास किया गया था.
UN ने इस कानून पर क्या आपत्ति जताई है?
UN की CERD कमेटी का कहना है कि यह कानून केवल फिलिस्तीनियों पर लागू होता है और इसराइल के नागरिकों को इससे छूट दी गई है, जो कि सीधा नस्लीय भेदभाव है.