यूनेस्को (UNESCO) ने शारजाह को एक बड़ी जिम्मेदारी के लिए चुना है। शारजाह अब पहला अरब शहर बन गया है जहां ‘अर्ली चाइल्डहुड केयर एंड एजुकेशन’ (ECCE-PATT) टूल का पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया जाएगा। इस पहल का मुख्य मकसद छोटे बच्चों की शिक्षा और देखरेख के स्तर को जांचना और उसे बेहतर बनाना है। यह घोषणा 8 फरवरी 2026 को की गई, जिससे शिक्षा के क्षेत्र में शारजाह की पहचान और मजबूत हुई है।
क्या है यह नया प्रोजेक्ट और इसका उद्देश्य?
इस टूल का पूरा नाम ECCE-PATT है, जिसे यूनेस्को ने तैयार किया है। इसका काम बच्चों की शुरुआती शिक्षा (Early Childhood Education) के क्षेत्र में उपलब्धियों को रिकॉर्ड करना है। यह टूल एक तरह का सेल्फ-असेसमेंट सिस्टम है जो यह पता लगाएगा कि शिक्षा की नीतियां कैसी हैं और बच्चों को दी जा रही सुविधाओं की गुणवत्ता क्या है।
इसके जरिए सिस्टम में मौजूद कमियों को पहचाना जाएगा। शारजाह में इस टूल के इस्तेमाल से जो नतीजे मिलेंगे, उनका उपयोग नर्सरी और अर्ली लर्निंग सेंटर्स के लिए सुधार योजनाएं बनाने में होगा। इसका लक्ष्य एक ऐसा मॉडल तैयार करना है जिसे बाद में पूरे क्षेत्र में लागू किया जा सके।
कौन सी संस्थाएं और विभाग इसमें शामिल हैं?
इस प्रोजेक्ट को सफल बनाने के लिए शारजाह के कई बड़े विभाग एक साथ मिलकर काम कर रहे हैं। इसमें शारजाह प्राइवेट एजुकेशन अथॉरिटी (SPEA) और शारजाह एजुकेशन एकेडमी (SEA) मुख्य भूमिका में हैं। इसके अलावा, शारजाह चाइल्ड फ्रेंडली ऑफिस (SCFO) और परिवार मामलों की सुप्रीम काउंसिल भी इस पहल का हिस्सा हैं।
यह पूरा प्रोजेक्ट शारजाह के शासक डॉ. सुल्तान बिन मुहम्मद अल कासिमी के निर्देशों के तहत चलाया जा रहा है। 14 और 15 फरवरी 2026 को ‘शारजाह इंटरनेशनल समिट’ के दौरान एक विशेष बैठक होगी। इस ‘क्लोज्ड पॉलिसी डायलॉग’ में अधिकारी और एक्सपर्ट्स इस प्रोजेक्ट के शुरुआती नतीजों पर चर्चा करेंगे।
