जेनेवा में चल रहे संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) के 62वें सत्र में ईरान की एक छात्रा का वीडियो दिखाया गया। इस वीडियो में मीनाब के Shajareh Tayebeh स्कूल की छात्रा Fatemeh Zahra Sheikh-abadi ने अपने साथ हुई घटना के बारे में बताया। इस वीडियो के जरिए दुनिया का ध्यान मीनाब क्षेत्र में बच्चों की स्थिति की तरफ खींचने की कोशिश की गई।

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यह वीडियो 18 जून 2026 को एक खास पैनल के दौरान चलाया गया, जो “Right to Education” यानी शिक्षा के अधिकार पर आधारित था। Fatemeh ने बताया कि 28 फरवरी 2026 को उनके स्कूल पर अचानक हमला हुआ था। उन्होंने कहा कि उन्होंने ऐसी चीजें देखीं जो किसी भी बच्चे को नहीं देखनी चाहिए। उनकी बस इतनी इच्छा थी कि वह स्कूल जाएं, पढ़ें और अपने दोस्तों के साथ खेल सकें।

छात्रा ने परिषद से अपील की कि वे मीनाब के बच्चों की बात सुनें और अमेरिका व इसराइल जैसे जिम्मेदार देशों को जवाबदेह ठहराया जाए। वीडियो खत्म होने के बाद, परिषद ने सभी पीड़ितों की याद में 30 सेकंड का मौन रखा। इसका मकसद स्कूलों की सुरक्षा और बच्चों के पढ़ने के अधिकार पर जोर देना था।

इस मामले में मानवाधिकार संगठनों ने भी अपनी बात रखी। Human Rights Watch ने 12 मार्च 2026 को कहा कि पुराने डेटा के कारण अमेरिका ने स्कूल को निशाना बनाया होगा, जो युद्ध के नियमों का उल्लंघन है। इसी तरह Amnesty International ने 16 मार्च को कहा कि स्कूल जैसे सुरक्षित स्थान पर हमला करना अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ है और इसके लिए दोषियों को सजा मिलनी चाहिए।

UN के मानवाधिकार उच्चायुक्त Volker Türk ने वैश्विक स्थिति पर बात करते हुए अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघन और मानवीय पीड़ा का जिक्र किया। वहीं Farida Shaheed ने साफ किया कि नागरिक ठिकानों या स्कूलों पर हमला करना युद्ध अपराध की श्रेणी में आता है। बता दें कि ईरान, चीन और क्यूबा ने ही इस हमले पर चर्चा के लिए परिषद से अपील की थी।