लेबनान में तनाव के बीच UNIFIL की सख्त चेतावनी, अपनी पोजीशन को लेबनीज सेना को सौंपा.

संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन यानी UNIFIL ने आगामी क्षेत्रीय तनाव को रोकने के लिए सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की है। 20 अगस्त 2026 को जारी किए गए इस आधिकारिक बयान में मिशन ने कहा कि दक्षिणी सीमा पर लगातार बढ़ रही अशांति और नियमों का उल्लंघन किसी भी पक्ष के हित में नहीं है। शांति बनाए रखने के लिए UN Security Council Resolution 1701 का सख्ती से पालन करना बेहद जरूरी हो गया है ताकि आम जनता की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
बढ़ता सैन्य तनाव और सीमा पर हलचल
यह सख्त चेतावनी पिछले कुछ दिनों में सीमा पर बढ़ी तनातनी के बाद आई है। 19 अगस्त 2026 को UNIFIL ने नाकूरा-टायर्स तटीय सड़क के पास लेबनीज क्षेत्र में इजरायली झंडे गाड़े जाने की घटना की कड़ी निंदा की थी, जिसे प्रस्ताव 1701 का सीधा उल्लंघन माना गया। इसके अलावा, मिशन द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक 5 अगस्त से 16 अगस्त के बीच दक्षिणी लेबनान में सैन्य गतिविधियों में भारी तेजी दर्ज की गई। इस दौरान हर दिन औसतन 137 मिसाइलें या प्रोजेक्टाइल रिकॉर्ड किए गए, जो एक शनिवार को बढ़कर 208 और रविवार को 185 तक पहुंच गए थे। इन हमलों की वजह से आम नागरिकों को अपना घर छोड़कर जाने के लिए मजबूर होना पड़ा और रोजमर्रा की जिंदगी बुरी तरह प्रभावित हुई।
लेबनीज सेना को सौंपी गई जिम्मेदारी
साल 2026 के अंत में UNIFIL का कार्यकाल समाप्त होने वाला है, जिसके चलते मिशन ने अपनी रणनीतिक स्थिति में बदलाव करना शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में 20 अगस्त 2026 को खर्दली-लिटानी क्षेत्र के मर्जायुन जिले की एक अहम पोजीशन को औपचारिक रूप से लेबनीज सेना की 7th Brigade को सौंप दिया गया। इस कदम का मुख्य उद्देश्य क्षेत्रीय सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी धीरे-धीरे लेबनीज सैन्य बलों के हाथों में सौंपना है, ताकि वे खुद अपने देश की सुरक्षा संभाल सकें।
भविष्य को लेकर राजनीतिक चर्चाएं
सुरक्षा परिषद द्वारा इस साल के अंत तक मिशन को समाप्त करने की योजना तय है, लेकिन लेबनान के राष्ट्रपति Joseph Aoun चाहते हैं कि यह शांति मिशन आगे भी जारी रहे। राष्ट्रपति इस सिलसिले में रोम की यात्रा करने वाले हैं जहाँ वे मिशन के भविष्य पर विस्तार से चर्चा करेंगे। वहीं दूसरी तरफ, वेटिकन सिटी ने भी लेबनान और इजराइल के बीच चल रहे समझौतों के क्रियान्वयन पर अपनी गहरी चिंता जताई है, जिसमें गैर-राज्य सशस्त्र समूहों के हथियारों को छोड़ने और दोनों देशों के बीच शत्रुता को पूरी तरह समाप्त करने की बात शामिल है।