Strait of Hormuz को लेकर आज संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की एक इमरजेंसी मीटिंग हो सकती है. बहरीन की मांग पर यह बैठक बुलाई जा रही है क्योंकि हाल ही में UAE के परमाणु केंद्रों पर ड्रोन हमले हुए हैं. इस प्रस्ताव को अब तक 129 से ज़्यादा देशों का समर्थन मिल चुका है और दुनिया की नज़रें अब आज की बैठक पर हैं.

प्रस्ताव में ईरान से क्या मांग की गई है?

अमेरिका और बहरीन द्वारा लाए गए इस प्रस्ताव का मुख्य मकसद समुद्री रास्तों को सुरक्षित करना और ग्लोबल एनर्जी सप्लाई को बचाना है. इस ड्राफ्ट में ईरान के लिए कुछ सख्त शर्तें रखी गई हैं:

  • हमलों पर रोक: ईरान को समुद्री हमलों, माइनिंग और टोल वसूलने का काम तुरंत बंद करना होगा.
  • माइन की जानकारी: ईरान को यह बताना होगा कि उसने समुद्र में कहाँ-कहाँ माइन बिछाई हैं और उन्हें हटाने के प्रयासों में सहयोग करना होगा.
  • मानवीय कॉरिडोर: राहत सामग्री पहुँचाने के लिए एक मानवीय कॉरिडोर बनाने की मांग की गई है.

किन देशों का साथ है और कौन है खिलाफ?

इस मामले में दुनिया के बड़े देश दो गुटों में बँटे नज़र आ रहे हैं. एक तरफ अमेरिका, बहरीन, सऊदी अरब, कतर, UAE और कुवैत जैसे देश हैं जो इस प्रस्ताव के समर्थक हैं. इसमें सोमालिया और कांगो भी शामिल हो गए हैं.

दूसरी तरफ रूस और चीन हैं जिन्होंने 7 अप्रैल 2026 को पहले ही इस तरह के प्रस्ताव को वीटो कर दिया था. चीन के राजदूत Fu Cong ने इस कदम को समय से पहले बताया है और संकेत दिया है कि वे इसे फिर से रोक सकते हैं. वहीं ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmaeil Baghaei ने कहा है कि वे ओमान के साथ मिलकर सुरक्षा का एक नया तंत्र तैयार कर रहे हैं.

बड़े अधिकारियों ने क्या कहा?

अमेरिका के विदेश मंत्री Marco Rubio ने बयान दिया कि ईरान अपनी हरकतों से दुनिया की अर्थव्यवस्था को बंधक बना रहा है. अमेरिकी राजदूत Mike Waltz ने साफ़ किया कि कोई भी देश अंतरराष्ट्रीय रास्तों पर माइन नहीं बिछा सकता और न ही वहां से टोल वसूल सकता है. ईरान ने इन आरोपों को खारिज करते हुए अमेरिका को ही समुद्री रास्तों के लिए सबसे बड़ा खतरा बताया है.

Frequently Asked Questions (FAQs)

यह इमरजेंसी मीटिंग क्यों बुलाई जा रही है?

UAE के परमाणु केंद्रों पर हुए ड्रोन हमलों के बाद बहरीन ने इसकी मांग की है ताकि Strait of Hormuz में जहाजों की आवाजाही और ग्लोबल एनर्जी सप्लाई सुरक्षित हो सके.

क्या यह प्रस्ताव पास हो पाएगा?

हालांकि 129 देशों ने इसका समर्थन किया है, लेकिन रूस और चीन के पास वीटो पावर है और वे पहले भी इसे रोक चुके हैं, जिससे इसके पास होने पर संशय बना हुआ है.

Sushma Kumari

Shushma covers Stories Around Expats and Helpful Contents Related to Daily life of Public. She completed Mass Communication Degree From Makhan lal Chaturvedi College Bhopal and Has 3 years of Field Experience. Earlier She Worked with Jagran Media Patna Office and Now Working with GulfHindi.com