संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) ने लाल सागर में हुथी विद्रोहियों के हमलों पर नजर रखने के लिए अपनी निगरानी व्यवस्था को 15 जनवरी 2027 तक बढ़ा दिया है। 14 जुलाई 2026 को पारित हुए प्रस्ताव संख्या 2826 के तहत यह फैसला लिया गया है, जिसे 13 सदस्य देशों का समर्थन मिला। चीन और रूस इस दौरान मतदान से दूर रहे। इस कदम का मुख्य उद्देश्य समुद्री व्यापार के रास्तों को सुरक्षित रखना और अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखला को बाधित होने से बचाना है।
तनाव और तीखी बयानबाजी
इस फैसले के दौरान अमेरिका और चीन के बीच तीखी बहस देखने को मिली। अमेरिका के संयुक्त राष्ट्र राजदूत Mike Waltz ने हुथियों को ईरान का मददगार बताया और उन पर समुद्री सुरक्षा को खतरे में डालने का आरोप लगाया। वहीं चीन के प्रतिनिधि Sun Lei ने अमेरिका पर सैन्य कार्रवाई बढ़ाकर शांति प्रक्रिया को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया। रूस ने भी इस प्रस्ताव को बेअसर बताते हुए कहा कि अक्टूबर 2025 के बाद से ऐसे किसी हमले की पुष्टि नहीं हुई है, जिसके लिए निगरानी जरूरी हो।
क्षेत्रीय हालात और ईरान की भूमिका
क्षेत्र में तनाव का स्तर इस कदर बढ़ गया है कि 14 जुलाई को ईरान पर तीन वाणिज्यिक जहाजों, जॉर्डन में अमेरिकी बेस और बहरीन में तीन अलग-अलग हमले करने के आरोप लगे हैं। जवाब में अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों पर नौसैनिक नाकाबंदी फिर से लागू कर दी है और ईरानी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। दूसरी तरफ, 13 जुलाई को हुथियों ने सऊदी अरब के Abha International Airport पर मिसाइल और ड्रोन से हमला किया, जिसके बाद वहां चार साल से चल रहा अनौपचारिक युद्धविराम खत्म हो गया है। बहरीन ने सुरक्षा परिषद से इस स्थिति पर सख्त कार्रवाई करने की मांग की है, जबकि संयुक्त राष्ट्र के सहायक महासचिव Khaled Khiari ने यमन के लोगों के नेतृत्व में बातचीत का रास्ता अपनाने पर जोर दिया है।
