भारत सरकार ने उन सभी मांगों को खारिज कर दिया है जिनमें UPI पेमेंट पर चार्ज लगाने की बात कही गई थी। वित्त मंत्रालय ने साफ कर दिया है कि आम जनता और छोटे व्यापारियों के लिए डिजिटल पेमेंट एकदम मुफ्त रहेगा। Paytm और PhonePe जैसी कंपनियों ने बड़े दुकानदारों पर चार्ज लगाने का सुझाव दिया था, लेकिन सरकार ने इसे फिलहाल नहीं माना है। यह फैसला करोड़ो यूपीआई यूजर्स के लिए बड़ी राहत लेकर आया है।

कंपनियों ने क्या मांग रखी थी?

Banks और Fintech कंपनियों का कहना था कि उन्हें हर ट्रांजेक्शन पर लगभग 2 रुपये का खर्च आता है। इसके लिए उन्होंने सरकार से मांग की थी कि बड़े दुकानदारों (जिनका टर्नओवर 10 करोड़ से ज्यादा है) पर 0.2 से 0.3 फीसदी का चार्ज लगाया जाए। उनका तर्क था कि सिस्टम को चलाने और फ्रॉड रोकने में काफी पैसा खर्च होता है। हालांकि, सरकार ने इस प्रस्ताव को होल्ड पर डाल दिया है और किसी भी तरह के एक्स्ट्रा चार्ज (MDR) से मना किया है।

सरकार ने बजट में दी राहत

सरकार ने UPI और RuPay डेबिट कार्ड के ट्रांजेक्शन को सपोर्ट करने के लिए बजट 2026-27 में 2,000 करोड़ रुपये की सब्सिडी दी है। यह पैसा बैंकों को उनके खर्च की भरपाई के लिए दिया जाएगा। सरकार का मानना है कि छोटे ट्रांजेक्शन ज्यादा होते हैं, इसलिए इस पर चार्ज लगाना सही नहीं होगा। RBI के डेटा के मुताबिक, देश में होने वाले 86% पेमेंट 500 रुपये से कम के होते हैं, जो आम आदमी की जरूरत से जुड़े हैं।

जनवरी में रिकॉर्ड तोड़ लेन-देन

जनवरी 2026 में UPI का इस्तेमाल बहुत ज्यादा बढ़ा है। आंकड़ों पर नजर डालें तो एक महीने में करीब 2,170 करोड़ ट्रांजेक्शन हुए हैं, जिनकी कुल वैल्यू 28.33 लाख करोड़ रुपये है। औसतन हर रोज 70 करोड़ बार लेन-देन होता है। फिलहाल वित्त मंत्रालय ने कहा है कि अगर भविष्य में बहुत जरूरी हुआ तो वे स्थिति को फिर से देखेंगे, लेकिन अभी के लिए यूजर्स को अपनी जेब ढीली नहीं करनी होगी।

Nura Basta

Nura Basta is the Editor at GulfHindi.com and a journalism graduate from IIMC Delhi. With more than 7 years of professional experience, he has worked with leading media organizations including Aaj Tak (2018–2021) and Gulf News (2021–2025). His reporting and editorial work primarily focus on Gulf news, current affairs, and issues relevant to the Indian diaspora. At GulfHindi.com, he is committed to providing credible, well-researched, and impactful content for Hindi readers in the Gulf.