अमेरिका ने बुधवार, 8 जुलाई 2026 को ईरान के उत्तर-पूर्वी हिस्से में रेलवे पुलों पर हवाई हमले किए हैं। यह लगातार दूसरे दिन की सैन्य कार्रवाई है जिससे दोनों देशों के बीच तनाव बहुत बढ़ गया है। अमेरिकी सेना का कहना है कि यह हमला ईरान की उन हरकतों का जवाब है जिससे समुद्री रास्तों पर खतरा बढ़ रहा था।
ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने बताया कि अमेरिकी हमलों में मश्हद (Mashhad) जाने वाली सड़कों के पुलों को निशाना बनाया गया। ईरान के नेयनावा कॉर्प्स ने कन्फर्म किया कि गोलिस्तान प्रांत के Aq Tekeh Khan Bridge पर अमेरिकी क्रूज मिसाइल से हमला हुआ है।
हमले की वजह और अमेरिका का रुख
ये हमले मंगलवार, 7 जुलाई से शुरू हुए सैन्य अभियान का हिस्सा हैं। US Central Command (CENTCOM) ने कहा कि Strait of Hormuz में व्यावसायिक जहाजों के खिलाफ ईरान की आक्रामकता की वजह से यह कदम उठाया गया। अमेरिका का मकसद ईरान की उस ताकत को कम करना है जिससे वह समुद्री रास्तों में बाधा डालता है।
राष्ट्रपति Donald Trump ने इसे बदला बताया और कहा कि वह ईरान को फिर से कड़ी कार्रवाई से जवाब देंगे। ट्रंप ने यह भी साफ कर दिया कि ईरान के साथ हुआ अंतरिम युद्धविराम समझौता अब खत्म हो चुका है। इसके साथ ही उन्होंने ईरान को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में तेल बेचने की अनुमति देने वाला लाइसेंस भी रद्द कर दिया है।
हमले का असर और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
- ईरान के नेयनावा कॉर्प्स ने बताया कि Aq Tekeh Khan Bridge पर हुए हमले में कोई हताहत नहीं हुआ है।
- अमेरिकी घोषणा के बाद ईरान के कई तटीय शहरों में धमाकों की खबरें आई हैं।
- NATO के महासचिव Mark Rutte ने अमेरिका के इस कदम का समर्थन किया और कहा कि युद्धविराम के उल्लंघन के कारण ये हमले जरूरी थे।
