ईरान के दक्षिणी हिस्से में मौजूद सिरिक (Sirik) शहर में शुक्रवार रात को जोरदार धमाकों की आवाजें सुनी गई हैं। यह धमाके अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव बढ़ने के बाद हुए हैं। अमेरिकी सेना ने खुद इस बात की पुष्टि की है कि उसने ईरान में मौजूद मिसाइल ठिकानों पर हमले किए हैं। इस घटना के बाद से पूरे इलाके में एक बार फिर तनाव का माहौल बन गया है और दोनों देशों के बीच समझौते को लेकर चल रही बातचीत पर खतरा मंडराने लगा है।

कहां-कहां हुए धमाके और क्या हुआ नुकसान?

रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह धमाके ईरान के होर्मोज़गान प्रांत के सिरिक काउंटी में हुए हैं। बताया जा रहा है कि धमाकों के दौरान ताहरुई (Tahrui) नाम के एक तटीय गांव में और सिरिक के पास स्थित एक टेलीकम्यूनिकेशन टावर पर मिसाइलें गिरी हैं। इसके अलावा ईरान के सरकारी मीडिया ने बताया कि सिरिक में बने एक बंदरगाह के पास भी एक मिसाइल गिरी है। हालांकि, होर्मोज़गान पोर्ट्स के डायरेक्टर हमीदरेजा मोहम्मदहुसैनी तख्ती (Hamidreza Mohammadhosseini Takhti) ने साफ किया है कि सिरिक बंदरगाह को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है और वहां कामकाज पूरी तरह से सामान्य रूप से चल रहा है।

अमेरिका ने क्यों किया हमला?

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने इस हमले की जिम्मेदारी लेते हुए एक बयान जारी किया है। अमेरिकी सेना के मुताबिक, गुरुवार को सिंगापुर के झंडे वाले एक कमर्शियल जहाज ‘एमवी एवर लवली’ (M/V Ever Lovely) पर ईरान की तरफ से ड्रोन हमला किया गया था। इसी हमले के जवाब में अमेरिकी वायुसेना ने शुक्रवार रात को ईरान के मिसाइल और ड्रोन स्टोर करने वाले ठिकानों के साथ-साथ उनके तटीय रडार सिस्टम को निशाना बनाया है। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि यह एक सीमित सैन्य कार्रवाई थी और वे किसी बड़े युद्ध की शुरुआत नहीं करना चाहते हैं।

ईरान की सेना ने क्या कहा?

दूसरी तरफ, ईरान के सरकारी मीडिया (IRIB) ने भी इन धमाकों की पुष्टि की है। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने कहा है कि उन्होंने अमेरिकी हमले के जवाब में क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर कार्रवाई की है। IRGC ने अमेरिका के इस कदम को ईरान की संप्रभुता का उल्लंघन बताया है और चेतावनी दी है कि अगर दोबारा ऐसे हमले हुए तो इसका कड़ा जवाब दिया जाएगा। वहीं ईरान के एक वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी इब्राहिम अजीजी (Ebrahim Azizi) ने कहा कि ईरान तनाव को बढ़ाना नहीं चाहता है और वह स्थिति को संभालने की कोशिश कर रहा है।

पहले से चल रही थी शांति समझौते की बात

यह पूरा विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध खत्म करने के लिए बातचीत चल रही थी। दोनों देशों ने 18 जून, 2026 को एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे और फाइनल डील की तैयारी कर रहे थे। लेकिन अब दोनों ही देश एक-दूसरे पर सीजफायर के नियमों को तोड़ने का आरोप लगा रहे हैं, जिससे स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) में सुरक्षा को लेकर चिंताएं काफी बढ़ गई हैं।

Sushma Kumari

Shushma covers Stories Around Expats and Helpful Contents Related to Daily life of Public. She completed Mass Communication Degree From Makhan lal Chaturvedi College Bhopal and Has 3 years of Field Experience. Earlier She Worked with Jagran Media Patna Office and Now Working with GulfHindi.com