अमेरिकी वायुसेना के एक कर्नल को ईरान की सीमा के अंदर से सुरक्षित बचा लिया गया है। उनका F-15E स्ट्राइक ईगल विमान 3 अप्रैल 2026 को गिर गया था, जिसके बाद वह करीब दो दिनों तक ईरानी सेना की नज़रों से बचकर छिपे रहे। इस पूरे मिशन में अमेरिका के बोइंग कंपनी द्वारा बनाए गए एक छोटे से CSEL डिवाइस ने उनकी जान बचाई और उनकी सही लोकेशन की जानकारी दी।

कैसे चला यह बड़ा रेस्क्यू ऑपरेशन?

जब कर्नल का विमान गिरा, तो ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के सैकड़ों जवान उनकी तलाश में जुट गए थे। ईरानी मीडिया ने नागरिकों से भी मदद मांगी थी और इनाम की घोषणा की थी। अमेरिका ने उन्हें बचाने के लिए ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ शुरू किया, जिसमें 155 विमान शामिल थे। सीआईए ने ईरानी सेना को भ्रमित करने के लिए एक अभियान चलाया, जबकि इजरायल ने खुफिया जानकारी दी। युद्ध सचिव पीट हेगसेथ ने इस बड़े मिशन को मंजूरी दी थी और रविवार 5 अप्रैल को उन्हें सुरक्षित निकाल लिया गया।

CSEL डिवाइस ने कैसे की मदद?

बोइंग CSEL एक छोटा और बेहद मजबूत संचार उपकरण है। यह डिवाइस मुश्किल हालात में फंसे सैनिकों के लिए एक लाइफलाइन की तरह काम करता है। इसकी मुख्य खूबियां नीचे टेबल में दी गई हैं:

फीचर विवरण
वजन लगभग 800 ग्राम
बैटरी लाइफ 21 दिनों तक काम करती है
सिग्नल तकनीक एन्क्रिप्टेड GPS सिग्नल जो ट्रैक नहीं किए जा सकते
मैसेजिंग बिना शोर किए पहले से तैयार संदेश भेजने की सुविधा
मजबूती पानी में 10 मीटर नीचे और गिरने पर भी सुरक्षित

इस डिवाइस ने कर्नल को सुरक्षित क्षेत्र तक पहुंचने में मदद की और जब रेस्क्यू हेलीकॉप्टर पास आए, तो इसने सटीक लोकेशन लॉक कर दी। राष्ट्रपति ट्रंप ने इस मिशन की तारीफ करते हुए सोमवार को कहा कि यह अमेरिकी इतिहास के सबसे साहसी रेस्क्यू ऑपरेशनों में से एक था। कर्नल ने अपनी ट्रेनिंग का इस्तेमाल कर एक पहाड़ की दरार में छिपकर खुद को बचाया था।

Praggya Singh sabal

Journalist from Noida. Covering Delhi, NCR and National Updates.