अमेरिका ने 29 जुलाई 2026 को ईरान के खिलाफ बड़ी सैन्य कार्रवाई शुरू की है। यह हमला जॉर्डन के Muwaffaq Salti एयर बेस पर ईरान द्वारा किए गए बैलिस्टिक मिसाइल हमले के जवाब में किया गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने इसे बहुत सख्त कार्रवाई बताते हुए कहा कि अब अमेरिका की बारी है और वे ईरान के ठिकानों पर जोरदार प्रहार करेंगे।
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हमले का विवरण और प्रभाव
अमेरिकी सेंट्रल कमांड CENTCOM ने पुष्टि की है कि यह ऑपरेशन दो घंटे तक चला। इसमें ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) के दर्जनों ठिकानों को निशाना बनाया गया। इनमें मिलिट्री कमांड सेंटर, ड्रोन और मिसाइल बनाने वाली जगहें और समुद्री सुरक्षा से जुड़े ठिकाने शामिल हैं। जॉर्डन की मीडिया के अनुसार उनके एयर डिफेंस ने बेस की तरफ आ रही 5 मिसाइलों को हवा में ही नष्ट कर दिया था।
वहीं, ईरान की सरकारी मीडिया का दावा है कि इस हमले में Qeshm Island पर 3 लोगों की मौत हुई है और एक रिहायशी इमारत को नुकसान पहुंचा है, जिसमें 2 बच्चों की जान गई है। इस कार्रवाई के बाद से दोनों देशों के बीच तनाव काफी बढ़ गया है। इससे पहले सऊदी अरब और अमेरिका ने इराक में ईरान समर्थित मिलिशिया पर भी संयुक्त हमले किए थे।
क्षेत्रीय स्थिति और चिंताएं
इस संघर्ष की वजह से पूरे क्षेत्र में तनाव का माहौल है। एपी-नोरक (AP-NORC) के एक सर्वे के मुताबिक, अमेरिका के करीब दो-तिहाई लोग मानते हैं कि ईरान के साथ युद्ध करना सही नहीं है और राष्ट्रपति ट्रंप की रेटिंग इस मामले में 28 प्रतिशत तक गिर गई है। इसके अलावा, मिस्र के Damietta बंदरगाह पर नेचुरल गैस ले जा रहे जहाजों में ड्रोन हमले के कारण आग लगने की घटना भी सामने आई है, हालांकि इसके पीछे किसका हाथ है, यह अभी स्पष्ट नहीं है।
