ईरान के दक्षिणी हिस्से में मौजूद बंदर अब्बास बंदरगाह (Bandar Abbas seaport) पर गुरुवार, 28 मई 2026 की सुबह जोरदार धमाके सुने गए. कुवैत न्यूज एजेंसी (KUNA) और अन्य आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, यह धमाके अमेरिकी एयरस्ट्राइक के बाद हुए हैं. इस घटना के बाद खाड़ी क्षेत्र (Gulf Region) में तनाव काफी बढ़ गया है, जहां कुवैत ने भी अपनी सीमा में आने वाले मिसाइल और ड्रोन हमलों को नाकाम किया है.
अमेरिकी सेना की कार्रवाई और डोनाल्ड ट्रंप का बयान
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (Centcom) ने पुष्टि की है कि उनकी सेना ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के पास खतरा पैदा कर रहे ईरान के चार ड्रोन मार गिराए. इसके अलावा, अमेरिकी सेना ने बंदर अब्बास में एक ईरानी ग्राउंड कंट्रोल स्टेशन पर भी हमला किया, जो पांचवां ड्रोन लॉन्च करने की तैयारी कर रहा था. अमेरिकी अधिकारियों ने इसे एक रक्षात्मक कदम बताया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ईरान के किसी भी समझौते के दावे को खारिज कर दिया और ओमान को भी चेतावनी दी कि इस जलमार्ग पर किसी का नियंत्रण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.
ईरान का पलटवार और कुवैत की रक्षात्मक कार्रवाई
इस हमले के जवाब में ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने 28 मई की सुबह 4:50 बजे एक अमेरिकी एयरबेस को निशाना बनाने का दावा किया है. ईरानी विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी हमले की कड़ी निंदा की और इसे संप्रभुता का उल्लंघन बताया. दूसरी तरफ, कुवैती सेना ने भी पुष्टि की है कि उनके एयर डिफेंस सिस्टम ने उनकी सीमा में आने वाले संदिग्ध मिसाइलों और ड्रोन को हवा में ही मार गिराया. ईरान की सरकारी मीडिया के अनुसार, उनके बलों ने होर्मुज जलडमरूमध्य को पार करने की कोशिश कर रहे जहाजों पर भी चेतावनी के तौर पर गोलीबारी की है.
Frequently Asked Questions (FAQs)
बंदर अब्बास में अमेरिकी हमला कब और क्यों हुआ?
यह हमला 28 मई 2026 को तड़के करीब 1:30 बजे हुआ. अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, उन्होंने सुरक्षा कारणों से ईरान के ड्रोन और बंदर अब्बास में एक ग्राउंड कंट्रोल स्टेशन को निशाना बनाया.
इस तनाव के बीच कुवैत ने क्या कार्रवाई की?
कुवैत की सेना ने 28 मई 2026 को अपने एयर डिफेंस सिस्टम की मदद से देश की ओर बढ़ रहे संदिग्ध मिसाइल और ड्रोन खतरों को हवा में ही रोककर नष्ट कर दिया.