अमेरिका ने 8 और 9 जुलाई 2026 को ईरान के छह शहरों में भीषण हवाई हमले किए हैं। ईरानी स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रवक्ता के मुताबिक इन हमलों में 17 लोगों की जान चली गई और 115 लोग घायल हुए हैं। इस घटना के बाद पूरे क्षेत्र में तनाव बहुत बढ़ गया है और ईरान ने अमेरिका को कड़ी चेतावनी दी है।
अमेरिका ने क्यों किया हमला
US Central Command (CENTCOM) ने बताया कि उन्होंने ईरान के खिलाफ ये ताकतवर हमले इसलिए किए क्योंकि ईरान ने Strait of Hormuz में कमर्शियल जहाजों पर हमले किए थे। CENTCOM के अनुसार 8 जुलाई को ईरान के 80 से ज्यादा ठिकानों को निशाना बनाया गया, जिनमें एयर डिफेंस सिस्टम, मिसाइल साइट्स, कमांड सेंटर और 60 से ज्यादा IRGC की छोटी नावें शामिल थीं। इसके बाद 9 जुलाई को तटवर्ती इलाकों में करीब 90 और ठिकानों पर हमले किए गए ताकि जहाजों के रास्ते को सुरक्षित रखा जा सके।
ईरान का पलटवार और खाड़ी देशों का हाल
ईरान के Khatam al-Anbiya सेंट्रल हेडक्वार्टर ने इन हमलों को सीधा हमला बताया है। जवाब में ईरान ने 9 जुलाई को बहरीन, कुवैत, कतर और जॉर्डन जैसे देशों की तरफ मिसाइलें और ड्रोन दागे। जॉर्डन की सेना ने 8 मिसाइलों को हवा में ही रोक दिया, जबकि कुवैत में एक व्यक्ति घायल हुआ है। IRGC ने कहा कि यह केवल पहले चरण का हमला था और अगर अमेरिकी हमले जारी रहे तो आगे और कार्रवाई होगी।
कूटनीतिक कोशिशें और मौजूदा स्थिति
ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने ओमान, तुर्की, पाकिस्तान और सऊदी अरब के अधिकारियों से फोन पर बात की और अमेरिका के इन हमलों की निंदा की। दूसरी ओर, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने 8 जुलाई को ईरान के साथ युद्धविराम (ceasefire) खत्म होने का ऐलान कर दिया था। हालांकि, अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि ईरान के साथ तकनीकी बातचीत अभी भी चल रही है।
इस पूरे विवाद का असर व्यापार पर भी पड़ा है। 9 जुलाई को Strait of Hormuz से गुजरने वाले जहाजों की संख्या काफी कम हो गई और ज्यादातर जहाज ईरान द्वारा बताए गए उत्तरी रास्ते का इस्तेमाल कर रहे थे।
