US Central Command (CENTCOM) ने 17 जुलाई 2026 को ईरान पर लगातार छठे दिन हवाई हमलों को अंजाम दिया है। अमेरिका ने फाइटर जेट, ड्रोन और युद्धपोतों की मदद से ईरान के सैन्य ठिकानों, तटीय निगरानी केंद्रों और रडार सुविधाओं को निशाना बनाया है। इस ऑपरेशन का मकसद ईरान की सैन्य ताकत को कम करना और कमर्शियल शिपिंग पर हुए हमलों का जवाब देना है।
ईरान के बुनियादी ढांचे पर बढ़ा दबाव
अमेरिकी हमलों का दायरा अब बढ़ गया है। इसमें ईरान के पुल, बिजली संयंत्र, Iranshahr एयरपोर्ट और Chabahar पोर्ट का मैरीटाइम कंट्रोल टावर शामिल है। अमेरिकी रक्षा मंत्री के अनुसार, चाबहार पोर्ट का टावर पूरी तरह नष्ट हो चुका है। ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, इन हमलों में अब तक 38 लोगों की मौत हुई है और 400 से अधिक लोग घायल हुए हैं।
गल्फ देशों में बढ़ा तनाव
ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने पलटवार करते हुए बहरीन, कुवैत, ओमान और जॉर्डन में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं। कुवैत के एक पावर प्लांट और डिसेलिनेशन प्लांट को भी निशाना बनाया गया है, जिसे कुवैत के विदेश मंत्रालय ने अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया है। तनाव के कारण खाड़ी क्षेत्र में समुद्री व्यापार पर असर पड़ा है और बिजली की भारी कमी के कारण ईरान सरकार ने नागरिकों को बिजली बचाने की सलाह दी है।
